कोलकाता , अप्रैल 05 -- पश्चिम बंगल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ट्रिब्यूनल ने अपने पहले अहम फैसले में चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिला के फरक्का विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बहाल किया जाए।
यह आदेश ट्रिब्यूनल की पीठ, जिसकी अध्यक्षता टी. एस. शिवग्नानम कर रहे थे, द्वारा दिया गया। यह फैसला श्री शेख के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण वे नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे थे।
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान श्री शेख का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिससे वे कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार होने के बावजूद चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए थे। 06 अप्रैल नामांकन की अंतिम तिथि और 23 अप्रैल को मतदान निर्धारित होने के कारण उनकी उम्मीदवारी संकट में पड़ गई थी।
बिजन भवन में हुई सुनवाई के दौरान श्री शेख ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र जैसे कई दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें उनका नाम "मेहताब शेख" दर्ज था। हालांकि, मतदाता सूची में उनका नाम "शेख मेहताफेरुल" दर्ज था, जिसे चुनाव आयोग ने "तार्किक विसंगति" बताते हुए आपत्ति जताई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता फिरदौस शमीम और सुश्री गोपा बिस्वास ने दलील दी कि यह विसंगति केवल सतही है और इससे व्यक्ति की पहचान में कोई बदलाव नहीं होता। वहीं आयोग की ओर से सुश्री दिव्या मुरुगेसन ने पक्ष रखा।
सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने माना कि कोई ठोस असंगति नहीं है और आयोग द्वारा बताई गई विसंगति का कोई आधार नहीं है। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की, "यह स्पष्ट है कि व्यक्ति वही है, इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है।"इसके बाद ट्रिब्यूनल ने आयोग को निर्देश दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर श्री शेख का नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल किया जाए, ताकि वे तय समय से पहले नामांकन दाखिल कर सकें। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एसआईआर ट्रिब्यूनल का पहला फैसला है, जिसका गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए किया गया था।
शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुसार, जिन व्यक्तियों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे ट्रिब्यूनल का रुख कर सकते हैं। इससे पहले ट्रिब्यूनल के कामकाज में देरी के कारण श्री शेख ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसके बाद अदालत ने ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित