लखनऊ , फरवरी 18 -- उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा लगाए जा रहे 'लाखों वोट काटने' के आरोपों पर चुनाव आयोग ने विस्तृत आंकड़े जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश में 12 करोड़ से अधिक मतदाताओं के बीच नाम विलोपन/संशोधन की प्रक्रिया में अब तक केवल लगभग 40 हजार फार्म-7 ही प्राप्त हुए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर वोट काटे जाने के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत साबित होते हैं।

सीईओ ने बताया कि प्रदेश में एक करोड़ चार लाख मतदाता ऐसे थे जिन्होंने अब तक अपनी मैपिंग नहीं कराई थी, जबकि दो करोड़ 22 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए। इस प्रकार कुल 3 करोड़ 26 लाख मामलों में से 3 करोड़ 25 लाख मतदाताओं को नोटिस जनरेट कर भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक एक करोड़ 85 लाख नोटिस प्राप्त हुए हैं और एक करोड़ 15 लाख मामलों की सुनवाई पूरी कर ली गई है। सुनवाई की प्रक्रिया को और तेज किया गया है। मतदाता सूची से अब तक कुल 23,935 नाम सामान्य प्रक्रिया में हटाए गए हैं, जबकि एसआईआर के दौरान दूसरे व्यक्ति की आपत्ति पर 4,336 नाम विलोपित हुए हैं। इनमें 6 थर्ड जेंडर मतदाताओं के नाम भी शामिल हैं।

रिणवा ने बताया कि कि प्रत्येक विलोपन निर्धारित प्रक्रिया और सुनवाई के बाद ही किया गया है। एसआईआर प्रक्रिया और नए मतदाता पंजीकरण अभियान में 13,161 अधिकारी सुनवाई में लगे हैं। प्रदेश भर में 4,635 स्थानों पर सुनवाई केंद्र बनाए गए हैं, जिन्हें आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नजदीकी स्थानों पर स्थापित किया गया है।

उन्होंने बताया कि बीएलओ घर-घर जाकर नोटिस उपलब्ध करा रहे हैं। अनुपस्थित मतदाता के परिजनों को भी नोटिस सर्व कराया जा सकता है। तार्किक विसंगति के मामलों में आधार जैसे प्रूफ ऑफ रिलेशनशिप दस्तावेज मान्य होंगे, जबकि नो-मैपिंग मामलों में आयोग द्वारा मान्य 13 प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। फार्म-6 में जन्म प्रमाण संबंधी दस्तावेज भी अनिवार्य हैं और मैपिंग कराना जरूरी किया गया है।

छह जनवरी से 18 फरवरी के बीच फार्म-6 के तहत 54,40,156 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 27,19,614 पुरुष, 27,20,320 महिलाएं और 222 थर्ड जेंडर श्रेणी के आवेदक शामिल हैं। 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 9,11,788 युवाओं ने पंजीकरण कराया है।

सीईओ के अनुसार पहले के ट्रेंड में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती थी, लेकिन अब आंकड़ों में महिलाओं का पंजीकरण पुरुषों से अधिक दर्ज हुआ है, जो सकारात्मक संकेत है।

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