रायबरेली , फरवरी 10 -- उत्तर प्रदेश के मुंशीगंज स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली ने स्कल-बेस सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के चिकित्सकों ने एंडोस्कोपिक विधि और कोब्लेशन तकनीक की मदद से एक जटिल नेज़ोफेरिंजियल ट्यूमर को बिना किसी बाहरी चीरे के सफलतापूर्वक हटा दिया। एम्स रायबरेली में इस तकनीक का यह पहला प्रयोग था।
एम्स के प्रवक्ता के अनुसार 20 वर्षीय छात्र लंबे समय से नाक बंद रहने और बार-बार रक्तस्राव की समस्या से पीड़ित था। जांच में उसे नेज़ोफेरिंजियल एंजियोफाइब्रोमा नामक दुर्लभ लेकिन आक्रामक ट्यूमर पाया गया, जो रक्त वाहिकाओं से बना होने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव का जोखिम पैदा करता है। नाक, कान एवं गला विभाग की प्रमुख डॉ. अनन्या सोनी ने बताया कि कोब्लेशन तकनीक से न्यूनतम रक्तस्राव के साथ सटीकता पूर्वक ट्यूमर को हटाया गया।
करीब तीन घंटे चली सर्जरी में लगभग चार सेंटीमीटर आकार के ट्यूमर को दूरबीन विधि से निकाला गया। सर्जिकल टीम का नेतृत्व डॉ. अनन्या सोनी और डॉ. अरिजीत जोतदार ने किया। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. कालीचरण दास ने किया। प्रवक्ता ने बताया कि सर्जरी का पूरा खर्च आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत वहन किया गया। एम्स रायबरेली ने इसे उन्नत चिकित्सा तकनीक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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