ऋषिकेश , मार्च 12 -- एम्स ऋषिकेश में नए नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान और कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से गुरुवार को सतत नर्सिंग शिक्षा (सीएनई) कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नर्सिंग पेशे में मरीजों की देखभाल करते समय अभिभावक की तरह भावनात्मक संयम और संवेदनशीलता रखना बेहद जरूरी है।
संस्थान में नोरसेट-9 परीक्षा के माध्यम से हाल ही में नियुक्त नर्सिंग अधिकारियों के लिए आयोजित नर्सिंग इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम में अब तक कुल 60 नए नर्सिंग अधिकारियों ने कार्यभार ग्रहण किया है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि नर्सिंग पेशा सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी का क्षेत्र है। कई बार नर्सों को मरीजों की देखभाल करते समय अभिभावक की भूमिका भी निभानी पड़ती है, इसलिए संयम और मृदु व्यवहार बेहद आवश्यक है।
डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने नर्सिंग पेशे को अस्पताल की रीढ़ बताते हुए टीम वर्क के साथ कार्य करने पर जोर दिया। वहीं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने कहा कि यह प्रशिक्षण नर्सिंग पेशेवरों को चिकित्सा क्षेत्र का बेहतर अनुभव देगा और मरीजों की देखभाल व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।
मुख्य नर्सिंग अधिकारी डॉ. अनिता रानी कंसल ने बताया कि सप्ताह भर चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नए नर्सिंग अधिकारियों को तकनीकी और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे मरीजों की बेहतर देखभाल कर सकें।
कार्यक्रम में उप निदेशक (प्रशासन) ले. कर्नल गोपाल मेहरा, डीन रिसर्च प्रो. शैलेन्द्र हाण्डू, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल प्रो. स्मृति अरोड़ा, डीएमएस डॉ. रवि कुमार, पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहन्ती सहित नर्सिंग विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
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