बेंगलुरु , मार्च 26 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) साइट आवंटन मामले में लोकायुक्त की 'बी-रिपोर्ट' को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कर्नाटक लोकायुक्त और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती सिद्दारमैया समेत कई पक्षों को नोटिस जारी किये हैं।

स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को जल्द से जल्द नोटिस तामील करने के निर्देश दिये। मामले की अगली सुनवाई प्रतिवादियों के जवाब दाखिल करने के बाद होगी।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि 'बी-रिपोर्ट' के जरिए मामले को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बंद किया गया, लेकिन यह गंभीर कानूनी और प्रक्रियागत खामियों से ग्रस्त है। आरोप है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया या ठीक से परखा नहीं गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

याचिका में अदालत से 'बी-रिपोर्ट' को निरस्त कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है, जिसे ईडी या किसी अन्य सक्षम एजेंसी से कराने का सुझाव दिया गया है।

यह विवाद एमयूडीए द्वारा साइट आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। मैसूर में शहरी नियोजन और भूमि आवंटन का कार्य करने वाले इस प्राधिकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाये गये हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च न्यायालय द्वारा कई एजेंसियों और प्रमुख व्यक्तियों को नोटिस जारी किया जाना इस बात का संकेत है कि मामला प्रारंभिक जांच से आगे बढ़ चुका है और विस्तृत न्यायिक परीक्षण की आवश्यकता है।

न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद एमयूडीए आवंटन प्रक्रिया पर निगरानी और राजनीतिक बहस दोनों तेज होने की संभावना है, जबकि प्रतिवादी आगामी सुनवाई में लोकायुक्त की रिपोर्ट का बचाव करेंगे।

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