श्रीगंगानगर , अप्रैल 09 -- राजस्थान के सर्वाधिक अनाज उत्पादक जिलों श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद प्रक्रिया में केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा लगाई गई अनेक बाधाओं के विरुद्ध गुरुवार को किसान , व्यापारी एवं मजदूरों ने धरना देकर प्रदर्शन किया।
किसान, व्यापारी और मजदूर संगठनों के संयुक्त आह्वान पर दोनों जिलों की अनाज मंडियों को तीन से चार घंटे तक पूरी तरह बंद रखा गया। मंडियों के सभी गेट बंद कर दिए गए और उनके आगे-पीछे सैकड़ों किसान, मजदूर व व्यापारी धरने पर बैठ गए।
कुछ स्थानों पर मंडी समिति कार्यालय के सामने भी धरना प्रदर्शन किया गया। इस आंदोलन को विपक्षी कांग्रेस के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा ने भी खुलकर समर्थन दिया। भाजपा नेताओं ने भी मांगों का समर्थन करते हुए राज्य एवं केंद्र सरकार के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे।
किसानों और व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि गेहूं खरीद के लिए लागू ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और स्लॉट सिस्टम को तुरंत बंद किया जाए तथा पुराने पारंपरिक तरीके पर ही खरीद की जाए। साथ ही खरीद का लक्ष्य भी बढ़ाया जाए क्योंकि इस बार दोनों जिलों में गेहूं का उत्पादन कहीं ज्यादा हुआ है।
इसी हफ्ते श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के कई इलाकों में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है, जिससे खेतों में खड़ी फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जगहों पर फसल खराब हो गई तो कहीं-कहीं गेहूं के दानों की चमक चली गई है और गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसलिए किसान संगठन सरकार से गुणवत्ता मानकों में कुछ छूट देने की मांग भी कर रहे हैं। सरकार ने गेहूं खरीद 16 मार्च से शुरू की थी, लेकिन शुरुआत में खरीद की अंतिम तिथि नहीं बताई गई थी। मात्र एक-दो दिन पहले अचानक घोषणा की गई कि खरीद 31 मई तक ही चलेगी।
इस छोटी अवधि पर किसान और व्यापारी बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि हालिया अतिवृष्टि और ओलावृष्टि के कारण कई किसान अभी तक खेतों से फसल की कटाई नहीं कर पाए हैं। परंपरागत रूप से बैसाखी 13 अप्रैल के बाद ही कटाई शुरू होती है। इतनी कम समयावधि में सभी किसान एमएसपी पर अपना गेहूं नहीं बेच पाएंगे। खुले बाजार में गेहूं के भाव काफी कम चल रहे हैं, इसलिए किसान एमएसपी पर ही बेचना चाहते हैं। लेकिन एक तरफ खरीद लक्ष्य कम रखा गया है, दूसरी तरफ खरीद अवधि भी घटा दी गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान का डर है।
मंडियों के बंद रहने से आम लोगों और व्यवसायियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मंडी क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित रहा। दोनों जिलों के किसान, व्यापारी और मजदूर संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि यदि उनकी मांगें जल्दी नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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