मुंबई , फरवरी 09 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए रेहन-मुक्त ऋण देने की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने संबंधी अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी।
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गत 06 फरवरी को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी घोषणा की थी। पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी। उन्होंने कहा कि काफी समय से इस सीमा में बदलाव नहीं किया गया था।
आरबीआई ने आज जारी अधिसूचना के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर को ऋण देने संबंधी दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। ये संशोधन 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।
संशोधन के तहत बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे मझौले और छोटे उद्यमों से 20 लाख रुपये के ऋण के लिए रेहन स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के प्रशासनाधीन प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम द्वारा वित्त पोषित इकाइयों को भी बैंक 20 लाख रुपये तक रेहन-मुक्त ऋण की सुविधा देंगे।
बैंक अपनी आंतरिक नीति के आधार पर अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले मझौले तथा छोटे उद्यमों के लिए रेहन-मुक्त ऋण की सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये भी कर सकते हैं।
आरबीआई ने कहा है कि जहां भी योग्यता बनती हो, बैंक दिये गये रेहन-मुक्त ऋण पर क्रेडिट गारंटी योजना का लाभ उठा सकते हैं।
संशोधनों में प्रावधान किया गया है कि बैंक रेहन-मुक्त सीमा तक दिये गये ऋण के बदले यदि उधारकर्ता से रेहन के रूप में सोना या चांदी स्वीकार करते हैं तो इसे दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जायेगा।
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