नयी दिल्ली , जनवरी 20 -- केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि सभी एनसीआर शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत लाया जाना चाहिए।

श्री यादव ने आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के शहरों रोहतक, मानेसर, पानीपत और करनाल में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बनाई गई कार्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने पीएम 10 के उच्च स्तर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित लगातार बनी हुई समस्याओं पर चिंता व्यक्त की जिसमें निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट, शामिल हैं। श्री यादव ने बताया कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए, वित्तपोषण और अनुमोदन से संबंधित मामलों सहित, हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री के साथ प्राथमिकता के आधार पर एक बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी एनसीआर शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत लाया जाना चाहिए।

श्री यादव ने स्थापना अनुमति (सीटीई) और संचालन अनुमति (सीटीओ) के साथ और बिना संचालित उद्योगों पर व्यापक डेटा संकलित किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने एनसीआर के सभी जिलाधिकारियों को सीटीओ/सीटीई अनुमतियों, कुल वाणिज्यिक बिजली कनेक्शनों और जीएसटी पंजीकरण वाली औद्योगिक इकाइयों से संबंधित डेटा एकत्र करने के निर्देश जारी किए।

उन्होंने प्रदूषण में योगदान देने वाले हितधारकों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सड़क की चौड़ाई और यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए छोटे नगर निगमों को सार्वजनिक परिवहन के लिए उपयुक्त आकार के वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों (एमआरएसएम) और हाथ से चलने वाले कूड़ा बीनने वाले यंत्रों के उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने सभी समीक्षाधीन शहरों से भीड़भाड़ और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मार्ट यातायात प्रबंधन योजनाएं प्रस्तुत करने का भी आह्वान किया।

उन्होंने नवीन और व्यावहारिक समाधानों के माध्यम से प्रदूषण की मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने के लिए जमीनी स्तर पर सशक्त नेतृत्व का प्रदर्शन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये।

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