मुंबई , दिसंबर 05 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से अंडरराइटिंग में कड़े मानक अपनाने और परिसंपत्ति गुणवत्ता पर नजदीकी नजर रखने के लिए कहा है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को चुनिंदा एनबीएफसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों एवं प्रबंध निदेशकों के साथ एक बैठक की। इसमें हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रोफाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं।
एनबीएफसी की कुल परिसंपत्ति में 53 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में श्री मल्होत्रा ने अपने संबोधन में उनसे अंडरराइटिंग के कड़े मानक अपनाने और परिसंपत्ति की गुणवत्ता पर नजदीकी नजर रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने ग्राहक केंद्रित रुख अपनाने, नैतिक व्यवहार और ग्राहकों की शिकायतों के जल्द से जल्द निवारण पर जोर दिया।
बैठक में सा-धन, माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशन नेटवर्क और फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल जैसे स्व-नियामक संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर, स्वामीनाथन जे., पूनम गुप्ता और एस.सी. मुर्मू ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
इसके अलावा श्री मल्होत्रा ने हाल ही में गठित भुगतान नियामक बोर्ड की पहली बैठक की भी अध्यक्षता की। बोर्ड ने भुगतान एवं सेटलमेंट सिस्टम्स विभाग के कामकाज की समीक्षा की। इस बैठक में भुगतान विजन 2028 का प्रारूप भी पेश किया गया। इसमें केंद्रीय बैंक द्वारा हाल में कराये गये डिजिटल भुगतान पर सर्वेक्षण की बड़ी बातों के बारे में भी जानकारी दी गयी।
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