नयी दिल्ली , अक्टूबर 28 -- लघु वित्त बैंक (एसएफबी) अपनी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घटाने के लिए अपने ऋण पोर्टफोलियो में विविधता ला रहे हैं।

साख निर्धारक एवं बाजार अध्ययन कंपनी क्रेडिट रेटिंग्स ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में एसएफबी द्वारा दिये गये ऋण की राशि दो लाख करोड़ रुपये को पार करने की तरफ बढ़ रही है जो सालाना आधार पर 16-17 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पिछले वित्त वर्ष में इसमें 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र से इतर ऋण पोर्टफोलियो के विस्तार तथा जोखिम में फंसे ऋणों की वसूली में तेजी से पिछले साल वृद्धि दर में आयी गिरावट का क्रम थम जायेगा।

क्रिसिल का कहना है कि एसएफबी ने लंबे समय से ऋण पोर्टफोलियो में विविधता को विकास का आधार बना रखा है। अधिकतर लघु वित्त बैंक पहले माइक्रोफाइनेंस संस्थान थे। यही आधार इस वर्ष भी बना रहेगा क्योंकि क्योंकि माइक्रो फाइनेंस में हाल की प्रतिकूल परिस्थितियों ने परिसंपत्ति-गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को कम करने के लिए अन्य क्षेत्रों में विविधीकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया है।

क्रिसिल का कहना है कि एसएफबी विविधीकरण पर इसलिए भी जोर दे रहे हैं क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लघु वित्त बैंकों के लिए सार्वभौमिक बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए सकल और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की सीमा क्रमशः तीन प्रतिशत और एक प्रतिशत तय की है।

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