भीलवाड़ा , जनवरी 31 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भोपाल ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा राजस्थान में राजमार्गोंके निर्माण एवं चौड़ा करने के दौरान काटे गये लाखों पेड़ों के बदले शर्तों के अनुसार करीब साढ़े आठ लाख पेड़ नहीं लगाने के मामले में वन विभाग की उदासीनता पर कड़ा रुख अपनाया है।
पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू द्वारा अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा के मार्फत दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर को शीघ्र जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये हैं। न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बार-बार निर्देशों के बावजूद प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर की ओर से अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया है।
श्री जाजू ने शनिवार को बताया कि एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस की तामील कराये और एनएचएआई द्वारा वन विभाग में जमा की गयी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि के उपयोग का पूरा विवरण दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करे।
उन्होंने बताया कि अधिकरण ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो प्रधान मुख्य वन संरक्षक को अगली सुनवाई 19 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
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