भीलवाड़ा , जनवरी 11 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) केन्द्रीय क्षेत्रीय पीठ भोपाल ने राजस्थान में बढ़ते वाहन प्रदूषण और वाहनों से वसूले जा रहे ग्रीन टैक्स के कथित दुरुपयोग के मामले में सचिव रोड ट्रांसपोर्ट एवं राजमार्ग मंत्रालय, परिवहन आयुक्त राजस्थान, सदस्य सचिव राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रमुख सचिव पर्यावरण, प्रमुख सचिव नगरीय विकास और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस जारी किया है।

एनजीटी ने एक संयुक्त जांच समिति का भी गठन किया है, जिसमें पर्यावरण विभाग, परिवहन विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति स्थल का निरीक्षण कर ग्रीन टैक्स के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर छह सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 23 मार्च को होगी।

पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश शिवकुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा ने सुनवाई में बताया कि राजस्थान में वाहनों से होने वाला प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। इसका सर्वाधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है।

याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से ग्रीन टैक्स लागू किया था। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक लगभग 2009.66 करोड़ रुपए की राशि ग्रीन टैक्स के रूप में वसूली गई लेकिन यह राशि हरियाली बढ़ाने और वायु प्रदूषण नियंत्रण में उपयोग नहीं की गई। आजादी के समय प्रदेश में 13 प्रतिशत भूमि वनों से आच्छादित थी जो नौ प्रतिशत रह गई है और सघनता 0.8 से 0.3 रह गई है ऐसे में यह राशि हरियाली बढ़ाने पर खर्च की जानी चाहिए।

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