भुवनेश्वर , फरवरी 06 -- राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की पूर्वी पीठ, कोलकाता ने ओडिशा के पुरी जिले में बलुखंड-कोणार्क वन्यजीव अभयारण्य के संवेदनशील क्षेत्रों में कथित वनों की कटाई एवं निर्माण गतिविधियों की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इन गतिविधियों से नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।

याचिकाकर्ताओं के वकील अखंड ने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना अभयारण्य और उसके पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, वनों की कटाई, भूमि की सफाई और स्थायी निर्माण की ओर न्यायाधिकरण का ध्यानाकर्षित किया है। इनसे प्राकृतिक आवास का विनाश हो रहा है और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन हो रहा है।

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