नयी दिल्ली , फरवरी 10 -- एक अंग्रेजी अखबार में छह फरवरी को छपी 'मेघालय में अवैध कोयला खदान में धमाके से 18 की मौत' शीर्षक वाली मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने पर्यावरण कानूनों के निरंतर उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त है।

यह चिंता तब व्यक्त की गयी है जब एनजीटी ने 'रैट-होल' कोयला खनन पर लंबे समय से प्रतिबंध लगा रखा है और इस प्रतिबंध को उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।

अधिकरण ने मंगलवार को टिप्पणी किया कि मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में अवैध रूप से संचालित 'रैट-होल' कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट के कारण हुई यह घटना प्रथम दृष्टया में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और भारतीय वन अधिनियम 1927 के उल्लंघन का संकेत देती है।

अधिकरण ने इन आरोपों पर भी गौर किया कि मौजूदा निगरानी तंत्र के बावजूद प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण में अवैध खनन गतिविधियां लगातार जारी हैं।

इस मामले पर अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ ए सेंथिल वेल की पीठ ने विचार किया।

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