तिरुवनंतपुरम , जनवरी 26 -- नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) ने श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी योगम) के साथ प्रस्तावित एकता पहल पर बातचीत से हटने का निर्णय लिया है। केरल विधानसभा चुनावों से पहले इस पहल को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी उत्सुकता का माहौल था।

यह निर्णय एनएसएस निदेशक मंडल की बैठक में लिया गया, जिसमें राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य की समीक्षा के बाद निष्कर्ष निकाला गया कि इस समय एसएनडीपी योगम के साथ किसी औपचारिक समझौते में प्रवेश करना उपयुक्त नहीं होगा। एनएसएस ने अपनी लंबे समय से चली आ रही नीति दोहराते हुए कहा कि वह सभी राजनीतिक दलों से समान दूरी बनाए रखेगा।

यह घटनाक्रम दोनों प्रभावशाली सामुदायिक संगठनों के बीच संभावित नजदीकी के संकेतों के बाद सामने आया है। इससे पहले एनएसएस के महासचिव जी सुकुमारन नायर ने हिंदू समाज में एकता को मजबूत करने के आह्वान का समर्थन किया था, जिसे व्यापक रूप से एनएसएस और एसएनडीपी द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले नायर और एझवा समुदायों के बीच संभावित तालमेल के संकेत के रूप में देखा गया था।

एनएसएस के भीतर हुई बाद की चर्चाओं में इस पहल में राजनीतिक मंशाओं के प्रवेश को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आईं। सूत्रों के अनुसार, एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन के पुत्र और राजनीतिक संबद्धताओं वाले नेता थुशार वेल्लापल्ली को एनएसएस नेतृत्व से बातचीत के लिए भेजे जाने के बाद संगठन सतर्क हो गया। एनएसएस नेतृत्व का मानना है कि इससे उस पहल का स्वरूप बदल गया, जिसे शुरुआत में सामाजिक संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

इसके बाद सुकुमारन नायर ने स्पष्ट किया कि एनएसएस किसी भी परिस्थिति में अपने मूल सिद्धांत 'समदूरम्' से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग के लिए खुला है, लेकिन किसी भी ऐसे प्रबंध का हिस्सा नहीं बनेगा जिसे राजनीतिक झुकाव के रूप में देखा जा सके।

श्री नटेसन ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें एनएसएस के निर्णय की जानकारी मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली है और वह आगे की टिप्पणी से पहले इस पर विस्तार से विचार करेंगे।

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