नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों को कथित तौर पर सुविधाएं देने का मामला दिल्ली पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के हवाले कर दिया गया है।
दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज की गयी कम से कम दो बड़ी साजिशों वाली प्राथमिकियों में से एक प्राथमिकी से संबंद्ध यह कार्रवाई इन कथित नेटवर्क को निशाना बनाने वाले अभियान का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्रवाई का निर्देश तत्कालीन पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने छह मार्च, 2025 को दिया था, जिसमें जटिल रैकेट की जांच के लिए पांच अप्रैल, 2025 तक प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिये गये थे।
जांच के लिए दिल्ली पुलिस की विशेष सेल, अपराध शाखा सहित विभिन्न कानून-व्यवस्था इकाइयों को लगाया गया था। उनका काम घुसपैठ के रास्ते, जाली दस्तावेज़ बनाने वाले सिंडिकेट, आवास प्रदान करने वाले और अवैध रोज़गार की सुविधा देने वाले लोगों सहित घुसपैठ के पूरे 'इकोसिस्टम' का पता लगाना था।
वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इन 'बड़ी साजिश' वाली प्राथमिकियों का उद्देश्य परतों को हटाना और उस व्यापक एवं बड़ी साज़िश का पता लगाना था, जिसके बारे में माना जाता है कि इसके जरिए बंगलादेश से दिल्ली में अवैध घुसपैठ बढ़ती जा रही है। यह कानूनी और जांच कार्रवाई पुलिस की ओर से चलाए गए बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान के बाद हुई है। इस अभियान के दौरान, अधिकारियों ने 16,000 से ज़्यादा लोगों की जांच की, 850 संदिग्ध अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया और कम से कम 50 लोगों को निर्वासित किया। मामले को एनआईए को हस्तांतरित करना केंद्र सरकार के इस मामले को गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित अपराध के रूप में देखने का संकेत है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित