पटना , नवंबर 15 -- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 243 विधायकों में से 130 यानी 53 प्रतिशत ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामलों की घोषणा की है।
हालांकि यह आंकड़ा पिछले चुनाव की तुलना में कुछ कम है, लेकिन फिर भी चिंता का विषय बना हुआ है।
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में चुने गये 241 विधायकों में से 163 यानी 68 प्रतिशत पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इस बार यह आंकड़ा घटकर 53 प्रतिशत पर आया है, लेकिन गंभीर मामलों की संख्या अभी भी बड़ी है।
वर्ष 2025 के चुनाव में विजयी 243 उम्मीदवारों में से 102 यानी 42 प्रतिशत पर गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। 2020 में यह आंकड़ा 241 में से 123 (51 प्रतिशत) था।
इनमें से हत्या से संबंधित मामलों का सामना करने वाले विजयी उम्मीदवारों की संख्या छह है। हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों वाले विधायकों की संख्या 19 है। वहीं, महिलाओं पर अत्याचार से संबंधित मामलों की घोषणा करने वाले विजेता प्रत्याशियों की संख्या नौ है।
ये आंकड़े चुनावी राजनीति में अपराध के बढ़ते प्रभाव को उजागर करते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंतनीय है।
विभिन्न राजनीतिक दलों के विजेताओं पर दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों के दलवार प्रतिशत इस प्रकार रहे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 89 विजयी प्रत्याशियों में से 43 (48 प्रतिशत), जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के 85 विजयी प्रत्याशियों में से 23 (27 प्रतिशत), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 25 विजयी प्रत्याशियों में से 14 (56 प्रतिशत), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19 विजयी प्रत्याशियों में से (53 प्रतिशत), कांग्रेस के छह विजयी प्रत्याशियों में से तीन (50 प्रतिशत), आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच विजयी प्रत्याशियों में से चार (80 प्रतिशत), राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विजयी प्रत्याशियों में से एक (25 प्रतिशत), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी- लेनिनवादी) के दो विजयी प्रत्याशियों में से एक (50 प्रतिशत), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक विजयी प्रत्याशी (100 प्रतिशत), इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के एक विजयी प्रत्याशी (100 प्रतिशत) और बहुजन समाज पार्टी के एक विजयी प्रत्याशी (100 प्रतिशत) ने अपने उपर गंभीर धाराओं के तहत मामले घोषित किये हैं।
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