नयी दिल्ली , अप्रैल 02 -- फर्टिलिटी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित बांझपन उपचार की की नयी पहल की गयी है।
यह पहल अग्रणी गौडियम आईवीएफ ने की है। इस नयी तकनीक के तहत एआई-आधारित एम्ब्रायोलॉजी सिस्टम्स को नियमित उपचार प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इसमें आधुनिक के माध्यम से स्पर्म और एम्ब्रियो के चयन को अधिक सटीक और डेटा-आधारित बनाने में मदद मिलती है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस पहल का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि एआई जैसी तकनीकों को अपनाना भारत की नवाचार क्षमता को दर्शाता है और भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक आधारित समाधान मजबूत करेगा।
यह तकनीकी इंटीग्रेशन आईवीएफ 2.0 के साथ साझेदारी में किया गया है, जिसकी स्थापना प्रसिद्ध एम्ब्रायोलॉजिस्ट डॉ. जैक्स कोहेन और डॉ. एलेजांद्रो चावेज़ ने की है।
गौडियम आईवीएफ की चेयरपर्सन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मणिका खन्ना ने कहा कि फर्टिलिटी केयर अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां सटीकता और डेटा-आधारित निर्णय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक से न केवल इलाज के परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि मरीजों का अनुभव भी अधिक सहज होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, SiD तकनीक स्पर्म की गति और गुणवत्ता का विश्लेषण कर बेहतर स्पर्म चयन में मदद करती है, जिससे सफल निषेचन की संभावना बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से मरीजों पर भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक दबाव कम होगा और फर्टिलिटी उपचार में भरोसा बढ़ेगा।
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