नयी दिल्ली , फरवरी 07 -- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक होने वाले 'इंडिया एआई इम्पैक्ट' समिट का उद्देश्य वैश्विक एआई चर्चाओं को जमीनी स्तर पर लोगों, विशेष रूप से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए वास्तविक और उपयोगी परिणामों में बदलना है।
यह बात इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पर इंडिया एआई मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने शुक्रवार को डिजिटल इंडिया - हमारे विशेषज्ञों से पूछो (आस्क अवर एक्सपर्ट्स) कार्यक्रम में कही।
श्री सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब भविष्य की अवधारणा नहीं है। यह भारतीयों के सीखने, काम करने, सेवाओं तक पहुंचने और रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने के तरीके को नया आकार दे रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के माध्यम से, भारत वैश्विक एआई चर्चा को 'इरादे से प्रभाव' की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एआई नवाचार, कौशल और लाभ सभी के लिए सुलभ हों, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए।
श्री सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया गया कि एआई किसानों को फसल नियोजन में सुधार करने, डॉक्टरों को तेज़ी से और अधिक सटीक निदान करने, शिक्षकों को व्यक्तिगत शिक्षण उपकरण उपलब्ध कराने, छोटे व्यवसायों और स्टार्ट अप्स को तेज़ी से आगे बढ़ने में सहायता करने और नौकरी चाहने वालों को नए करियर विकल्प खोजने में मदद कर सकता है। शिखर सम्मेलन ऐसे व्यावहारिक उपयोगों को प्रदर्शित करेगा, जिससे यह पता चलेगा कि एआई केवल स्वचालन का साधन नहीं बल्कि समावेशन, दक्षता और सशक्तिकरण का साधन कैसे बन सकता है।
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