नयी दिल्ली , जनवरी 08 -- ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने पूर्व भारतीय फॉरवर्ड सदातुल्ला खान के निधन पर शोक व्यक्त किया, जिनका 6 जनवरी को बेंगलुरु में कुछ समय की बीमारी के बाद निधन हो गया।

वह 75 साल के थे। वह एक बेहतरीन ड्रिबलर थे और एक ऐसे मजबूत फॉरवर्ड थे जिनके लिए कोई भी डिफेंस मुश्किल नहीं था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें गेंद को अपने पैरों से चिपकाकर अंदर-बाहर जाने या हाफ टर्न या फुल टर्न लेने की क्षमता थी। एक बार जब गेंद उनके कंट्रोल में आ जाती थी, तो किसी के लिए भी उसे छीनना मुश्किल होता था।

इन क्षमताओं के साथ, सदातुल्ला खान ने 1968 मर्डेका कप के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने 11 अगस्त, 1968 को कुआलालंपुर में मलेशिया के खिलाफ सीनियर नेशनल टीम में डेब्यू किया और देश के लिए पांच मैच खेले, जिसमें तीन गोल किए (दो दक्षिण वियतनाम के खिलाफ और एक बर्मा के खिलाफ) ये सभी गोल 1968 मर्डेका कप में किए थे।

घरेलू स्तर पर, सदातुल्ला ने 1965 और 1966 में संतोष ट्रॉफी में मैसूर का प्रतिनिधित्व किया। क्लब स्तर पर, उन्होंने देश की कई प्रमुख टीमों के साथ एक शानदार करियर का आनंद लिया।

मोहम्मडन स्पोर्टिंग के साथ, सदातुल्ला ने 1967 में कलकत्ता फुटबॉल लीग जीती और उन्हें व्यापक रूप से खिताब जीतने वाले अभियान का मुख्य खिलाड़ी माना जाता था।

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