नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कथित विदेशी फंडिंग नेटवर्क की जांच के तहत मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में एम/एस सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की।
ईडी के सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई 2021 से 2025 के बीच एसएसपीएल को प्राप्त छह करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध विदेशी धनराशि की जांच का हिस्सा हैं। गाजियाबाद स्थित इस कंपनी का संचालन हरजीत सिंह और उनकी पत्नी ज्योति अवस्थी करते हैं।जांच में सामने आया है कि यह विदेशी धनराशि "परामर्श शुल्क" के नाम पर क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (सीएएन) और स्टैंड.अर्थ जैसी विदेशी संस्थाओं से प्राप्त की गयी थी। इन संस्थाओं को रॉकफेलर फिलान्थ्रॉपी एडवाइजर्स जैसे पूर्व-संदर्भ श्रेणी के गैर-सरकारी संगठनों से बड़ी मात्रा में निधि मिली थी। विदेश में निधि भेजने वाली संस्थाओं की फाइलिंग के सत्यापन से संकेत मिला है कि यह धन वास्तव में भारत में जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि (एफएफ-एनपीटी) के एजेंडे को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से भेजा गया था।
एफएफ-एनपीटी एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन के उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है। ईडी का कहना है कि इसे भले ही जलवायु पहल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा हो, लेकिन इसके अपनाए जाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
ईडी की जांच में संकेत मिले हैं कि यह गतिविधियां केवल एक आवरण हो सकती हैं और कंपनी का मुख्य उद्देश्य विदेशी प्रभावकारी समूहों की ओर से भारत में एफएफ-एनपीटी से जुड़े एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी धन का इस्तेमाल करना रहा है।
ईडी के अनुसार, 2020-21 से पहले एसएसपीएल को घाटा हो रहा था और परामर्श से होने वाली आय बेहद सीमित थी, लेकिन 2021 के बाद जब कंपनी को 6.5 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी धनराशि प्राप्त हुई तो उसने इन पैसों को "परामर्श सेवाओं" और "कृषि उत्पादों की बिक्री" से हुई आय दिखाकर मुनाफा दर्ज करना शुरू कर दिया। जांच एजेंसी को संदेह है कि कंपनी के शेयरधारक हरजीत सिंह और ज्योति अवस्थी ने विदेशी गैर-सरकारी संगठनों से प्राप्त धन का एक हिस्सा निजी उपयोग के लिए अपने व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित किया।
उन्होंने बताया कि गाजियाबाद में एसएसपीएल के निदेशक के आवास पर तलाशी के दौरान भारतीय और विदेशी निर्मित शराब का एक बड़ा भंडार भी बरामद हुआ, जो अनुमेय सीमा से अधिक था। इस जानकारी को तत्काल उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग के साथ साझा किया गया, जिसके बाद विभाग ने अतिरिक्त शराब जब्त की और उत्तर प्रदेश आबकारी कानूनों के उल्लंघन के आरोप में हरजीत सिंह को गिरफ्तार किया।
ईडी के अनुसार हरजीत सिंह स्वयं को जलवायु कार्यकर्ता बताते हैं और सतत संपदा जलवायु संस्थान के संस्थापक निदेशक हैं। वह और उनकी पत्नी पहले क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क साउथ एशिया से जुड़े रहे हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपनी सक्रियता को आगे बढ़ाने के लिए एसएसपीएल का इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसी दंपति की विदेशी यात्राओं की भी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि वे फरवरी 2025 में 'ब्रीद पाकिस्तान समिट' में भाग लेने के लिए पाकिस्तान गए थे और वहां जिन लोगों से उनकी मुलाकात हुई, उनकी भी जांच की जा रही है। इसके अलावा, हरजीत सिंह ने दिसंबर 2025 में भारत विरोधी प्रदर्शनों के दौरान बांग्लादेश की यात्रा की थी, जहां उन्होंने बिना किसी आधिकारिक आमंत्रण के शेर-ए-बांग्ला विश्वविद्यालय में व्याख्यान दिया और कथित तौर पर ऐसे लोगों से मुलाकात की, जिनका यात्रा के घोषित उद्देश्य से कोई संबंध नहीं था। इन यात्राओं के लिए धन की व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
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