श्रीनगर , नवंबर 01 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 2014 की विनाशकारी बाढ़ के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार को प्रदान की गई धनराशि में कथित अनियमितताओं पर शनिवार को सवाल उठाए।
श्री अब्दुल्ला ने आज यहां सर्वाजनिक समारोह को संबोधित करते हुए शहर में बार-बार बाढ़ की आशंका पर चिंता व्यक्त की और सरकार 2014 के बाद की बाढ़ पुनर्वास परियोजनाओं से संबंधित सभी रिकॉर्ड खोले जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक दशक से भी ज़्यादा समय से श्रीनगर पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, "क्या हमें श्रीनगर शहर को बाढ़ से बचाने का कोई अधिकार नहीं है? हमें बताएं कि 2014 के बाद शहर की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए? कौन-कौन सी परियोजनाएँ बनाई गईं और विश्व बैंक से आया पैसा कहाँ है?"झेलम नदी की तलकर्षण और बाढ़ रिसाव चैनल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने तत्कालीन पीडीपी-भाजपा सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "झेलम नदी की तलहटी की परियोजना पर जो पैसा खर्च हुआ था-वो पैसा किसने खाया? क्या वह तलहटी सचमुच हुई थी? उस समय प्रभारी मंत्री कौन थे? इसकी ज़िम्मेदारी किसकी थी? फ़ाइलें खोलिए और हमें बताइए कि बाढ़ राहत का पैसा कहां गया।"उन्होंने कहा , "इस साल अगस्त में सिर्फ़ दो दिन की बारिश के बाद श्रीनगर में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। वर्ष 2014 में लगातार छह दिन बारिश के बाद तटबंध टूटे थे। इस बार यह तीसरे दिन हुआ। पिछले कुछ सालों में आपने श्रीनगर शहर के लिए क्या किया? इस शहर की अनदेखी क्यों की गई?" उन्होंने आगे कहा कि इस साल केवल ईश्वरीय कृपा से ही एक बड़ी आपदा टल पाई।
श्री अब्दुल्ला ने उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भाजपा पर पलटवार करते हुए अधिकारियों से आग्रह किया कि वे "सभी फ़ाइलें खोलें"-न केवल वर्तमान सरकार की, बल्कि पिछली सरकारों की भी-ताकि लोगों के सामने सच्चाई आ सके। उन्होंने कहा , "आज आप मेरे उप-मुख्यमंत्री पर उंगली उठा रहे हैं। उन्होंने साफ़ कहा था, फ़ाइलें खोलो, बहीखाते खोलो और देखो क्या हुआ। मैं कहता हूं, हमारी सरकार के साथ-साथ उस समय की सरकार (पीडीपी-भाजपा सरकार) की फ़ाइलें भी खोलो।"मुख्यमंत्री ने कहा "उपेक्षा सिर्फ़ श्रीनगर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू तक भी है। जम्मू शहर को भी उसका हक़ नहीं मिला। पिछले दस सालों में दोनों शहरों की जो उपेक्षा हुई है, उसे मेरी सरकार ठीक करेगी। हम धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करते।" उन्होंने श्रीनगर और जम्मू के बीच नागरिक सचिवालय के द्विवार्षिक स्थानांतरण को समाप्त करने के लिए भी भाजपा पर निशाना साधा, जिसे इस साल निर्वाचित सरकार ने बहाल किया था। उन्होंने कहा "उन्होंने जम्मू शहर के साथ क्या किया? ऐसी क्या मजबूरी थी कि दरबार स्थानांतरण बंद कर दिया गया? यह दरबार स्थानांतरण शेर-ए-कश्मीर (शेख अब्दुल्ला) की विरासत नहीं थी, न ही फ़ारूक़ अब्दुल्ला की, और न ही मेरी। यह प्रथा 1947 से पहले भी चली आ रही थी।"श्री अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू शहर से राजनीतिक प्रतिनिधित्व न होने के बावजूद, उनकी सरकार ने निष्पक्षता बनाए रखने और क्षेत्र में प्रशासनिक न्याय बहाल करने के लिए काम किया। उन्होंने कहा, "अगर हमने धर्म या चुनाव के आधार पर फैसला किया होता, तो मुझे जम्मू शहर से एक भी विधायक नहीं मिलता और मैं कभी कार्यालय नहीं खोलता। लेकिन यह देखते हुए कि जम्मू के साथ अन्याय हुआ था, हमने वहाँ दरबार मूव को बहाल किया और उस अन्याय को दूर किया।" उन्होंने ज़ोर दिया कि उनकी सरकार संतुलित शासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हमारे रास्ते में बाधाएं आएंगी, लेकिन ईश्वर की इच्छा से, हम अन्याय के खिलाफ खड़े रहेंगे।"इससे पहले मुख्यमंत्री ने आज नेहरू पार्क से क्राल सांगरी तक बुलेवार्ड रोड के चौड़ीकरण और चार लेनिंग की आधारशिला रखी, जो श्रीनगर के दर्शनीय और पर्यटन बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के सरकार के चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। लोक निर्माण (आर एंड बी) विभाग द्वारा 19.94 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से क्रियान्वित की जा रही इस प्रतिष्ठित परियोजना का उद्देश्य कश्मीर के सबसे प्रतिष्ठित झील किनारे के इलाके में सड़क संपर्क में सुधार करना है।
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