वाराणसी , नवंबर 17 -- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ''उभरते चुंबकीय भंडारण उपकरणों एवं सेंसर'' विषय पर मंगलवार को दो दिवसीय भारत-इटली संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्कूल ऑफ मटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एसएमएसटी) ने आज देव एवं वर्धना गोस्वामी व्याख्यान संकुल में इस संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला में भारत और इटली के ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों तथा विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की तथा चुंबकीय सामग्रियों और उन्नत सेंसर प्रौद्योगिकियों में हो रहे नवीनतम शोध एवं विकास पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. श्रवण कुमार मिश्रा ने अतिथियों, वक्ताओं तथा गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान में वैज्ञानिक एवं तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए निदेशक प्रो. अमित पात्रा के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए एसएमएसटी के प्रमुख प्रो. चंदन उपाध्याय ने कहा कि यह आयोजन आधुनिक प्रवृत्तियों, नवाचारी पद्धतियों तथा चुंबकीय सामग्रियों, अगली पीढ़ी की मेमोरी उपकरणों और उन्नत सेंसर तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर गहन चिंतन-मनन के लिए एक समर्पित मंच उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि भारत और इटली के बीच यह सहयोग इन उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध एवं ज्ञान के आदान-प्रदान को नई गति प्रदान करेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. निलय कृष्ण मुखोपाध्याय, डीन (फैकल्टी अफेयर्स), आईआईटी (बीएचयू) ने कहा कि यह कार्यशाला चुंबकीय प्रौद्योगिकियों में हालिया प्रगति को समझने के लिए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और युवा विद्वानों को एक मंच पर लाती है। स्पिनट्रॉनिक्स में किए गए अग्रणी योगदान वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुके हैं और ये डेटा भंडारण, सेंसर निर्माण, कंप्यूटिंग, स्वास्थ्य सेवाओं तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अंतर्विषयी क्षेत्रों से जुड़े उभरते रुझानों के अनुरूप हैं।
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