लखनऊ , जनवरी 07 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने 'दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन' के लिए 'स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना' को प्रभावी रूप से लागू किया है।

योजना के तहत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में शामिल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित पुनर्वासन परियोजनाओं को अनुदान दिया जाएगा। योजना का लाभ दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास के रूप में मिलेगा।

प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बुधवार को बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि दिव्यांगजन हर क्षेत्र में आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक संस्थाओं की सहभागिता से दिव्यांग पुनर्वासन को नया विस्तार मिलेगा और सामाजिक भागीदारी भी मजबूत होगी।

योजना के अंतर्गत अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, डे-केयर सेंटर, प्री-प्राइमरी एवं विशेष विद्यालयों का संचालन, कौशल विकास कार्यक्रम, ब्रेल व सहायक उपकरणों की उपलब्धता, पाठ्य सामग्री निर्माण तथा दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों को अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे दिव्यांग बच्चों की शुरुआती पहचान कर उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाया जा सकेगा।

मंत्री ने बताया कि योजना के लिए पारदर्शी और तकनीक आधारित चयन प्रक्रिया अपनाई गयी है। वही स्वैच्छिक संस्थाएं पात्र होंगी, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हों, नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण के साथ विशिष्ट पहचान संख्या रखती हों तथा कम से कम दो वर्षों का अनुभव रखती हों।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित