लखनऊ , जनवरी 6 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग को आकर्षित करने के उद्देश्य से मंगलवार को तीन हजार करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश करने वाली कंपनियों को विशेष प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस फैसले का उद्देश्य उच्च तकनीक विनिर्माण को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुये वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि बैठक में कुल 14 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से एक को स्थगित कर दिया गया जबकि 13 प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 में लागू राज्य की सेमीकंडक्टर नीति के तहत बड़े निवेश करने वाली कंपनियों को मामले-दर-मामले आधार पर प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन प्रोत्साहनों में ब्याज अनुदान, कर्मचारी लागत की प्रतिपूर्ति, 10 वर्षों तक जीएसटी में छूट तथा 10 साल तक प्रति यूनिट 2 रुपये तक की बिजली दर सब्सिडी शामिल है।
श्री खन्ना ने बताया कि इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के पेशेवर कर्मचारियों के लिए ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) योगदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 2,000 रुपये प्रति माह होगी। साथ ही जल शुल्क में भी रियायतें दी जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा, "इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र की वैश्विक दिग्गज कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना और राज्य को पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।" उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह उद्योग अमेरिका, यूरोप, जापान और ताइवान के देशों के वर्चस्व में है।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में अब तक 21 कंपनियों ने निवेश शुरू कर दिया है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होने की उम्मीद है।
स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि कैबिनेट ने वर्ष 2022 के उस निर्णय का विस्तार किया है, जिसके तहत पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क 5,000 रुपये तक सीमित किया गया था। उन्होंने बताया कि यह सुविधा पहले केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों तक सीमित थी, लेकिन अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पारिवारिक दायरे में गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित की जाने वाली व्यावसायिक संपत्तियों पर भी लागू होगी।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट ने वाराणसी में शिव प्रकाश गुप्ता मंडलीय जिला अस्पताल के स्थान पर 500 बेड के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 315 करोड़ रुपये होगी और इसे चार वर्षों में पूरा किया जाएगा। परियोजना की 60 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी।
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