लखनऊ , जनवरी 06 -- ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) उन्मूलन की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश में अग्रणी प्रदर्शन किया है। बीते वर्ष प्रदेश में 6.75 लाख टीबी मरीजों की पहचान का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 6.90 लाख मरीजों की पहचान कर उनका इलाज सुनिश्चित किया गया।
इससे पहले वर्ष 2023 और 2024 में भी उत्तर प्रदेश टीबी मरीजों के चिन्हिकरण के निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर चुका है।
नेशनल टीबी टास्क फोर्स के वाइस चेयरमैन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि टीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी तरीका अधिक से अधिक मरीजों की समय रहते पहचान और उपचार है। उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में निरंतर बेहतर प्रयास किए हैं। बीते तीन वर्षों में हुए प्रयासों के चलते प्रति एक लाख आबादी पर टीबी के मामलों में कमी आई है और टीबी से होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में प्रदेश में 27 लाख से अधिक मामलों की जांच नैट (नॉट) मशीन से की गई। विशेषज्ञों के अनुसार स्मियर माइक्रोस्कोपी से कई टीबी मरीज छूट जाते हैं, इसलिए नैट जांच को लगातार बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2024 में जहां 13 लाख मामलों की जांच नैट से हुई थी, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 27 लाख से अधिक हो गई।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने बताया कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम किया जा रहा है। वर्ष 2015 की तुलना में नए टीबी रोगियों में 17 प्रतिशत और मृत्यु दर में भी 17 प्रतिशत की कमी आई है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से अब तक 2,18,986 लक्षणहीन टीबी रोगियों की पुष्टि की गई है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित