त्रिशूर , मार्च 01 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि संगीत भारत की पुरानी सभ्यता की सबसे सटीक और अचूक अभिव्यक्ति है और इसने लाखों दिलों को एक लय में पिरोया है।

उन्होंने भारत की समृद्ध संगीत विरासत के बाबत कहा, "भारत का संगीत एक आध्यात्मिक यात्रा, एक ध्यान, एक प्रार्थना और जीवन का उत्सव है।"वह त्रिशूर के पास नादथारा में चेतना गणाश्रम की नींव रख रहे थे। उल्लेखनीय है कि चेतना गणाश्रम एक सांस्कृतिक और संगीत परिसर है जिसका मकसद आध्यात्मिक जागृति और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है।

उन्होंने भारतीय संगीत की ऐतिहासिक गहराई की खोज करते हुए कहा कि वेदों के भजनों से लेकर संतों की भक्ति रचनाओं तक, संगीत भारतीय सभ्यता में पवित्र गंगा की तरह बहता रहा है। श्री राधाकृष्णन ने चोल राजाओं के बनाए बृहदेश्वर मंदिर के शिलालेखों का जिक्र करते हुए कहा कि उनमें सैकड़ों संगीतकारों और नर्तकों की नियुक्ति और उन्हें संरक्षण देने का जिक्र है, जो दक्षिण भारत की संगीत संस्कृति की जीवंतता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि थेवरम जैसे पवित्र भजन मंदिरों में नियमित रूप से गाए जाते हैं, जो भारत की संगीत परंपराओं को दिखाते हैं।

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