उदयपुर , जनवरी 01 -- राजस्थान में पर्यटन नगरी उदयपुर को बाल भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम से मुक्त करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, बाल अधिकारिता विभाग एवं पुलिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान मे गुरूवार को "स्माइल उदयपुर" अभियान का शुभारंभ किया गया।

जिला कलेक्टर नमित मेहता के निर्देशन में प्रारंभ हुआ यह अभियान राज्य में अपनी तरह का पहला नवाचारपूर्ण और सख्त अभियान माना जा रहा है। अभियान की शुरुआत कलक्ट्रेट परिसर में भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम के विरुद्ध शपथ एवं हस्ताक्षर अभियान से की गई।

इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर (नगर) जितेन्द्र ओझा की उपस्थिति में बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति रेस्क्यू वाहन को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य धु्रव कुमार कविया, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष यशोदा पणिया, श्रम आयुक्त संकेत मोदी, पुलिस उपाधीक्षक छगन पुरोहित, मानव तस्करी निरोधक इकाई प्रभारी दीपिका राठौड़, यूनिसेफ प्रभारी सिंधु बिनुजीत सहित अन्य अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक के.के. चन्द्रवंशी ने बताया कि "स्माइल उदयपुर" अभियान तीन चरणों में संचालित किया जाएगा। प्रथम चरण एक से 31 जनवरी तक रहेगा। इसमें शहर में निरंतर राहत अभियान चलाकर बाल भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम में लिप्त बच्चों को मुक्त कराया जाएगा।

द्वितीय चरण में दो फरवरी से 31 मार्च तक फॉलोअप अभियान के तहत बचाये गये बच्चों का पुनर्वास, शिक्षा एवं काउंसलिंग सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वे पुनः इस कुप्रथा में न फंसें। तृतीय चरण में भिक्षावृत्ति से प्रभावित पर्यटन स्थलों एवं सार्वजनिक क्षेत्रों को भिक्षावृत्ति मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाएगा, आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अभय कमाण्ड सेंटर के सीसीटीवी कैमरों से प्रमुख चौराहों, पर्यटन स्थलों एवं सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी की जाएगी।

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