नयी दिल्ली , जनवरी 24 -- राष्ट्रीय राजधानी सहित हिमाचल प्रदेश , पंजाब , जम्मू-कश्मीर , राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में शीतलहर चलने से ठंड का प्रकोप बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में करीब डेढ़ फुट तक हुई भारी हिमपात के कारण शनिवार को लगातार दूसरे दिन जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित रहा। अधिकांश सड़कें बंद रहने से यातायात लगभग ठप हो गया और शहर का संपर्क आसपास के क्षेत्रों तथा देश के अन्य हिस्सों से कटा रहा।
इस बीच दोपहर तक सड़कें और प्रमुख संपर्क मार्ग बहाल नहीं हो सके, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शिमला पुलिस द्वारा आज सुबह जारी ताजा यातायात परामर्श के अनुसार, भारी बर्फबारी और फिसलन के चलते शिमला से बाहर जाने वाली कई प्रमुख सड़कें बंद रहीं। इनमें शिमला-करसोग, शिमला-थियोग, थियोग-कोटखाई, थियोग-रामपुर, थियोग-रोहड़ू और थियोग-चौपाल मार्ग शामिल हैं।
शिमला-सोलन राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी फिसलन की स्थिति बनी रही, जिसके चलते वाहन चालकों को यात्रा से बचने की सलाह दी गयी। शहर के भीतर भी सभी प्रमुख आंतरिक सड़कें बंद रहीं। वाहनों की आवाजाही लगभग पूरी तरह रुक जाने के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यस्थलों तक नहीं पहुंच सके और सरकारी कार्यालयों व संस्थानों में उपस्थिति काफी कम रही।
जिला प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे प्रमुख सड़कों के खुलने तक यात्रा न करें, क्योंकि मौजूदा हालात सुरक्षित आवाजाही के अनुकूल नहीं हैं। इस बीच, आपात सेवाओं को सुचारु रखने के लिए एजेंसियां अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों की ओर जाने वाले प्राथमिक मार्गों से ब्लैक आइस हटाने के कार्य में जुटी हुई हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, केलांग में लगभग 75 सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई। लाहौल स्पीति जिला देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है। "पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार है कि शिमला और उसके आसपास के इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है।"भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, ऊंचे इलाकों में भारी हिमपात और मध्य और निचले पहाड़ी क्षेत्रों में व्यापक बारिश के साथ-साथ पूरे राज्य में भीषण ठंड की स्थिति बनी हुई है। जनजातीय क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहां केलांग में लगभग 75 सेमी हिमपात दर्ज किया गया।
हिमाचल प्रदेश में24 घंटे तक जारी रही बारिश ने सड़क, रेल और हवाई संपर्क को बाधित कर दिया, वहीं भारी हिमपात से सड़कें अवरुद्ध हो गईं और बिजली एवं संचार लाइनें टूट गईं। चंबा और शिमला जिलों में तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, बिजली के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और कुछ स्थानों पर छतों को उड़ा ले गए। राज्य भर में सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त बना हुआ है और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है खासकर ऊंचे और आदिवासी क्षेत्रों में।
हिमाचल प्रदेश के शिमला और आसपास के इलाकों में भारी बारिश और हिमपात के कारण ऐतिहासिक कालका-शिमला रेल मार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और खराब मौसम की वजह से ट्रैक पर भूस्खलन होने के साथ-साथ कई स्थानों पर पेड़ और बड़े पत्थर गिर गए, जिससे ट्रेनों की आवाजाही को लंबे समय तक रोकना पड़ा।
रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई), चंडीगढ़ ने आज जारी अपने बर्फीले तूफान चेतावनी (एवलांच वार्निंग) बुलेटिन में उत्तराखंड राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन की संभावनाओं को देखते हुए सतर्कता बरतने की आवश्यकता व्यक्त की है। इसके तत्काल बाद उत्तराखंड के सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से राज्य में वर्षा, बर्फबारी एवं कोहरे के दृष्टिगत विभिन्न जनपदों में उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की।
इस दौरान उन्होंने जन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने तथा अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और नियमित तौर पर अपडेट ले रहे हैं।
श्री सुमन ने बताया कि डीजीआरई के अनुसार, जनपद उत्तरकाशी में 2800 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा स्तर-2 (येलो) दर्शाया गया है। वहीं जनपद चमोली में 3000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में खतरा स्तर-3 (ऑरेंज) अंकित किया गया है। इसके अतिरिक्त रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ एवं बागेश्वर जनपदों में 2800 मीटर से अधिक ऊँचाई पर हिमस्खलन खतरा स्तर-2 (येलो) बताया गया है।
उन्होंने बताया कि डीजीआरई के अनुसार इन क्षेत्रों में बर्फ की स्थिति आंशिक रूप से अस्थिर है तथा कुछ स्थानों पर प्राकृतिक हिमस्खलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से चमोली जनपद के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम आकार के हिमस्खलन संभावित हैं।
सचिव आपदा ने बताया कि इस चेतावनी के दृष्टिगत lसंबंधित जनपदों को अलर्ट पर रखा गया है। जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखें। पर्यटकों एवं स्थानीय नागरिकों को सावधानी बरतने के लिए जागरूक करें तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों एवं राहत-बचाव दलों को तैयार अवस्था में रखें।
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