चेन्नई , मार्च 23 -- उत्तर भारत में लगातार और गहराते जा रहे घने कोहरे के पीछे बहुत ज्यादा सूक्षम कण युक्त प्रदूषण का बड़ा हाथ है। आईआईटी-मद्रास के नेतृत्व में हुए एक नये अंतरराष्ट्रीय शोध ने इसके पुख्ता सबूत दिये हैं।
'साइंस एडवांसेज' और 'जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स' में प्रकाशित नये निष्कर्ष बताते हैं कि रात के समय होने वाले भारी प्रदूषण ही कोहरे के बढ़ने की मुख्य वजह है।
आईआईटी-मद्रास ने सोमवार को बताया कि यह अध्ययन सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर चंदन सारंगी और एन. अरुण ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर किया है।
शोध के अनुसार, रात के समय हवा में मौजूद प्रदूषक कणों का मिश्रण उत्तर भारत में कोहरे को और घना और लंबा बनाने में मदद करता है। क्षेत्र में सर्दियों की रातों में जब हवा कम चलती है तो यह जमीन के पास प्रदूषकों को जमा होने में मदद करती हैं। जैसे ही तापमान गिरता है, हवा की नमी (वाष्प) इन कणों पर जमने लगती है। इससे पानी की छोटी बूंदें बन जाती हैं, जिनका आकार कुछ माइक्रोमीटर होता है। कोहरे में ऐसी बूंदों की संख्या बहुत ज्यादा (प्रति घन मीटर 10 से 500 लाख) होती है, जो रोशनी को रोकती हैं और दृश्यता कम कर देती हैं।
जब ये बूंदें बनती हैं, तो वे 'गुप्त ऊष्मा' छोड़ती हैं। इस ऊर्जा के कारण कोहरा करीब 600-800 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ जाता है, जो पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा है। अगली सुबह यह मोटी परत एक ढाल की तरह काम करती है और सूरज की रोशनी को रोक देती है। सौर ऊर्जा जमीन तक न पहुंच पाने के कारण सतह गर्म नहीं हो पाती। इससे कोहरा छंटने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यही कारण है कि दिन भर आसमान धुंधला बना रहता है, जिससे उड़ानें रद्द होती हैं और ट्रेनें देरी से चलती हैं।
आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शाेधार्थी श्री अरुण ने कहा, "यदि कोहरे की परत बनी रहती है तो सतह पर सूरज की गर्मी और कम हो जाती है। इससे अगली रात वाष्पीकरण यानी ओस जमने के लिए और भी अनुकूल स्थितियां बन जाती हैं। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि कोहरे की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े उत्तर भारत के वायु परिसंचरण में बदलाव है, हालांकि अब हम यह समझ पा रहे हैं कि कोहरे को लंबा खींचने में क्षेत्रीय प्रदूषण भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"डॉ. सारंगी ने कहा, "ये निष्कर्ष इस बात की बेहतर समझ प्रदान करते हैं कि प्रदूषण कैसे कोहरे की तीव्रता और उसकी अवधि को प्रभावित कर सकता है। यह जानकारी कोहरे के पूर्वानुमान को सुधारने में महत्वपूर्ण हो सकती है और पायलटों व हवाई अड्डों को बेहतर और सटीक निर्णय लेने में मदद कर सकती है।"यह शोध आशा की किरण भी है। कोहरा सीधे तौर पर उत्तर भारत के प्रदूषण के सूक्ष्म कणों के स्तर से जुड़ा है। वायु गुणवत्ता में सुधार कर सर्दियों के दिनों में कोहरे की घटनाओं और उसकी गंभीरता को सीधे तौर पर कम किया जा सकता है।
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