नैनीताल , अप्रैल 26 -- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को महिला आरक्षण पर चल रहे विवाद पर कहा कि प्रदेश इस मामले में एक माडल प्रस्तुत कर सकता है और वह आने वाले विधानसभा चुनाव में महिलाओं के लिये 33 प्रतिशत आरक्षण का उदाहरण पेश कर सकता है।
कांग्रेस नेता ने यह बात आज सरोवर नगरी नैनीताल में पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मामले में केन्द्र सरकार की नीयत साफ नहीं है और वर्ष 2023 में जब आरक्षण बिल पास किया गया तो तब केन्द्र ने इसे जनसंख्या के साथ जोड़ दिया था।
अब जब मोदी सरकार पर जन दबाव बढ़ा तो आनन फानन में महिला आरक्षण बिल लाया गया और उसे परिसीमन के साथ जोड़ दिया गया और उसका पास न होने की ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया गया। उन्होंने केन्द्र सरकार से कहा कि संसद की 543 सीटों पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण घोषित किया जाये।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार इस मामले में देश में सबसे पहले पहल करे और 28 अप्रैल को बुलाये गये विधानसभा के विशेष सत्र में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस और भाजपा के साथ ही सभी विपक्षी दलों से इसमें साथ देने की अपील कर रहे हैं।
श्री रावत ने प्रदेश में आग (वनाग्नि) और बाघ (मानव वन्य जीव संघर्ष) के साथ ही जाम (यातायात) के मामले में भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे प्रदेश भाजपा सरकार की देन बताया। उन्होंने कहा कि वनों में आर्द्रता खत्म हो गयी है और इससे वनाग्नि की घटनायें बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने वनों में आर्द्रता के लिये चाल खाल और मेरा वृक्ष मेरा धन योजना संचालित की थी लेकिन वर्ष 2017 में भाजपा सरकार ने दोनों योजनाओं को रोक दिया। जिससे वनों में नमी खत्म हो गयी और फलस्वरूप आग की घटना सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ग्रामीणों पर हो रहे बाघ के हमले को रोकने और यातायात जाम पर लगाम लगाने के लिये भी सरकार के पास न तो कोई विजन है और न ही कोई ठोस योजना है।
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