नैनीताल , फरवरी 11 -- उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़ी बहुमूल्य भूमि को निजी क्षेत्र को बेचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा, राज्यहित और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ ख़तरनाक कदम है।
बुधवार को जारी विज्ञप्ति में कांग्रेस नेता ने कहा कि यह निर्णय सीधे तौर पर उत्तराखंड की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को कमजोर करने और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी मुनाफाखोरों के हवाले करने की साजिश प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाक पत्थर एवं ढालीपुर स्थित परियोजनाओं से संबंधित 76.7348 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईडीबी) को हस्तांतरित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
श्री आर्य ने बताया कि यह भूमि कोई साधारण संपत्ति नहीं है, बल्कि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से उत्तराखंड की जल विद्युत परियोजनाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षित की गई रणनीतिक परिसंपत्ति है। इसी क्षेत्र से यमुना स्टेज-1, यमुना स्टेज-2, व्यासी, लखवाड़, किशाऊ, टौंस जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं का संचालन और निर्माण जुड़ा हुआ है।
भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना लगभग असंभव है और सरकार इस सच्चाई से भली-भांति अवगत है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि यह भूमि निजी हाथों में चली गई तो प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न होगा। बिजली उत्पादन की भविष्य की योजनाएं ठप हो सकती हैं और भारत सरकार की यमुना पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत लखवाड़ एवं किशाऊ जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह राज्य के रणनीतिक संसाधनों को कमजोर करने का गंभीर षड्यंत्र है। श्री आर्य ने इस फैसले को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया सड़क से लेकर सदन तक विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल भूमि की नहीं बल्कि उत्तराखंड के भविष्य, ऊर्जा सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।
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