नैनीताल , फरवरी 20 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हत्या के प्रयास के मामले में सजायाफ्ता एचआईवी पीडि़त बंदी को चिकित्सा आधार पर जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ में बंदी की अपील पर सुनवाई हुई। पीठ ने बंदी की गंभीर स्थिति और जेल में उचित उपचार की कमी के तर्क को स्वीकार करते हुए जमानत के निर्देश दे दिए।
मामला उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर थाने से संबंधित है। रुद्रपुर की निचली अदालत (तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश) ने 07 जनवरी 2025 को पीड़ित बंदी और अन्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास और २० हजार रुपएं के जुर्माने की सजा सुनाई थी इसके खिलाफ पीड़ित ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि बंदी एचआईवी पॉजिटिव है और जेल में उचित उपचार नहीं मिल पाने के चलते उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि एड्स जैसी बीमारी के लिए निरंतर और विशेष चिकित्सा देखरेख की आवश्यकता होती है।
राज्य सरकार की ओर से आरोपी की मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई। सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि जेल प्रशासन की ओर से पीड़ित को पर्याप्त चिकित्सा उपलब्ध कराती जा रही है और जरूरत पडऩे पर उसे उच्च चिकित्सा केंद्रों में भी रेफर किया गया है।
पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत के पर्याप्त आधार मौजूद हैं । मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
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