नैनीताल , जनवरी 22 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जल संस्थान में अवर अभियंता के पद पर तैनात याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने के मामले में सरकार समेत जल संस्थान से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के बकाये का भुगतान याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे। न्यायमूर्ति आलोक महरा की अवकाशकालीन पीठ ने ललित मोहन पांडे के प्रकरण में सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के अनुसार, जल संस्थान में अवर अभियंता पद पर आवेदन करने के बाद वर्ष 2002 की चयन प्रक्रिया में 15 जून 2004 को उनका परीक्षा परिमाण घोषित किया गया, जिसमें वह चयनित हुए।

आगे कहा कि विभाग ने उन्हें जनवरी 2006 में अवर अभियंता के पद पर नियुक्ति दी। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह पुरानी पेंशन तथा अन्य समस्त देयकों का हकदार है और पुरानी पेंशन योजनाओं का लाभ पाने का विकल्प भी शासन को दे चुका है।जिसकी संस्तुति भी जल संस्थान की ओर से कर दी गयी।

याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया कि शासन ने 15 दिसम्बर, 2025 को एक आदेश पारित कर पूर्व दी गई संस्तुति को निरस्त कर दिया और पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से इन्कार कर दिया। शासन इसका आधार नियुक्ति वर्ष 2006 में बताया। यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता 31 जनवरी, 2026 को सेवानिवृत्त हो रहा है।

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