लखनऊ , नवम्बर 19 -- उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित विद्युत सखी कार्यक्रम बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है।

वर्ष 2020 में कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक स्वयं सहायता समूह की विद्युत सखियों ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए 2400 करोड़ रुपये से अधिक का बिल संग्रह किया है। इसके बदले उन्हें 33.05 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन प्राप्त हुआ है, जो ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक प्रगति का मजबूत प्रमाण है।

इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर तक सर्वाधिक कलेक्शन कर बाराबंकी की राजश्री शुक्ला प्रदेश में पहले स्थान पर रहीं। अमेठी की सोनी द्विवेदी दूसरे और रामपुर के स्वार की मिशार जहाँ तीसरे स्थान पर रहीं। इसी तरह खंदौली आगरा की कुसुम लता फतेहपुर बाराबंकी की लक्ष्मी देवी स्वर रामपुर की सविता देवी बागपत की रजनी राजपुरा मेरठ की संगीता बुलंदशहर की गीता रानी फतेहपुर सिकरी आगरा के विनेश शामिल हैं।

जबकि शीर्ष तीन विद्युत सखियों बाराबंकी की राजश्री शुक्ला ने 10 महीनों में 28,567 बिल जमा कर 701 लाख रुपये से अधिक का संग्रह किया। जिस पर उन्हें 7.54 लाख रुपये से अधिक कमीशन मिला। वहीं अमेठी की सोनी द्विवेदी ने 18,416 बिल जमा कर 680 लाख रुपये से अधिक का संग्रह किया। जिस पर उन्हें 7.22 लाख रुपये से अधिक कमीशन मिला है। रामपुर की मिशार जहाँ ने 19,309 बिल का 575 लाख रुपये से अधिक संग्रह कर 6.97 लाख रुपये से अधिक कमीशन हासिल किया है।

गौरतलब है कि योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाना, उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को मिली यह आर्थिक सशक्तिकरण की राह आज पूरे प्रदेश में एक प्रेरक मॉडल बन चुकी है।

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