भुवनेश्वर , फरवरी 06 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने ओडिशा सरकार को राष्ट्रीय प्रतीक (सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंह शीर्ष की प्रतिकृति) के अनुचित उपयोग और गलत चित्रण को रोकने के लिए राज्य स्तरीय टास्कफोर्स गठित करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मानस रंजन पाठक की पीठ ने यह आदेश सिविल सोसायटी समूह 'अलोन ट्रस्ट' की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में राष्ट्रीय प्रतीक के बार-बार गलत उपयोग और त्रुटिपूर्ण प्रस्तुतीकरण की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया था।

न्यायालय ने सार्वजनिक भवनों, यहां तक कि न्यायालय परिसरों में भी प्रतीक के गलत चित्रण पर चिंता जताई। विशेष रूप से भुवनेश्वर के इंदिरा गांधी पार्क में "सत्यमेव जयते" आदर्श वाक्य के अभाव तथा वर्ष 2024 में 75वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान ओडिशा की झांकी में राष्ट्रीय प्रतीक के गलत प्रदर्शन का उल्लेख किया गया। झांकी में सिंह शीर्ष के नीचे "सत्यमेव जयते" अंकित नहीं था और हाथी एवं घोड़े के बीच प्रत्येक सिंह के नीचे अशोक चक्रों का समुचित अंकन भी नहीं किया गया था।

पीठ ने गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर एक टास्कफोर्स गठित किए जाने के निर्देश दिए।इसमें पुलिस, परिवहन, शिक्षा, सूचना एवं जनसंपर्क, विधि, शहरी विकास और पंचायती राज विभागों के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। यह टास्कफोर्स राष्ट्रीय प्रतीक के दुरुपयोग से संबंधित सुझावों, आपत्तियों और शिकायतों की मासिक समीक्षा करेगी।

न्यायालय ने राज्य सरकार को टास्कफोर्स के कार्य संचालन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने तथा एकीकृत ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करने का भी निर्देश दिया। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक फोटो, वीडियो और जियो-टैग की गई शिकायतें अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल में अनुमत और निषिद्ध उपयोग से संबंधित सामान्य प्रश्न भी उपलब्ध होंगे तथा की गई कार्रवाई की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। यह पोर्टल राज्य स्तरीय टास्कफोर्स के साथ-साथ जिला ई-ऑफिस, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों से भी एकीकृत रहेगा, ताकि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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