उज्जैन , नवंबर 17 -- मध्यप्रदेश में सर्वप्रथम स्थापित 132 के.वी. सब-स्टेशन उज्जैन का ज्योति नगर अपनी 65 वर्ष की गौरवशाली विद्युत यात्रा पूरी कर चुका है। पांच सिंहस्थों में शहर को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने वाला यह सब-स्टेशन अब सिंहस्थ-2028 के लिए विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि उज्जैन की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए शहर की विद्युत पारेषण प्रणाली को और अधिक मजबूत, आधुनिक और विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

वर्ष 1960 में प्रारंभ हुआ यह सब-स्टेशन प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की आधारशिला साबित हुआ है। यह न सिर्फ उज्जैन की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता रहा है, बल्कि राज्य के ट्रांसमिशन ढांचे की नींव रखने वाले प्रमुख केंद्रों में भी शामिल रहा है। इसने पिछले पांच सिंहस्थों के दौरान उज्जैन को बिना बाधित बिजली आपूर्ति देकर अपनी तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता साबित की है।

ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि एमपी ट्रांसको मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक सबस्टेशन का तकनीकी उन्नयन और आधुनिकीकरण लगातार किया जा रहा है ताकि सिंहस्थ के समय बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित रहे। आरंभिक समय में यह सबस्टेशन गांधीसागर जल विद्युत संयंत्र से 132 के.वी. फीडर के माध्यम से विद्युत प्राप्त करता था।

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