जम्मू , फरवरी 06 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश पर बढ़ता वित्तीय दबाव उच्च प्रतिबद्ध व्यय और सीमित स्वयं राजस्व क्षमता के कारण है। उन्होंने विधानसभा में अपना दूसरा बजट पेश करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कर और गैर-कर मदों से होने वाली स्वयं की आय बजटीय आवश्यकताओं का केवल 25 प्रतिशत ही पूरा कर पाती है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयां, संरचनात्मक बाधाएं और विशेषकर बिजली क्षेत्र की अक्षमताएं इस दबाव को और बढ़ाती हैं, जिससे केंद्र सरकार पर निर्भरता बढ़ जाती है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने राजस्व बढ़ाने, व्यय को तर्कसंगत बनाने और वित्तीय पारदर्शिता सुधारने के उद्देश्य से वित्तीय सुधारों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को निवेश और नवाचार का केंद्र बनाने के लिए व्यवसाय-अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।वित्त विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट व्यापक परामर्श प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों, उद्योग जगत और विभिन्न हितधारकों से संवाद किया गया। उन्होंने इसे सहभागी शासन की दिशा में एक नई पहल बताया है।
उन्होंने कहा कि बीता वर्ष जम्मू-कश्मीर और देश दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। राष्ट्रीय स्तर पर जहां 6 से 8 प्रतिशत की विकास दर के बावजूद भू-राजनीतिक चुनौतियों ने वैश्विक बाजारों तक पहुंच को प्रभावित किया, वहीं जम्मू-कश्मीर में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद की परिस्थितियों ने अर्थव्यवस्था को झटका दिया।
मुख्यमंत्री ने अगस्त और सितंबर में आई विनाशकारी बाढ़ का भी उल्लेख किया, जिसने जम्मू क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि पर्यटन, हस्तशिल्प, बागवानी और कृषि सहित सभी आर्थिक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है, जिससे रोजगार और कारोबार पर असर पड़ा है और परिवारों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।
श्री अब्दुल्ला ने कहा कि यह बजट समावेशी और सतत विकास की दृष्टि पर आधारित है तथा बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और सुशासन में विवेकपूर्ण निवेश के माध्यम से अवसरों का सृजन करने का प्रयास करता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया।
उन्होंने स्वीकार किया कि सड़क संपर्क, जल आपूर्ति, सीवरेज, पर्यटन और बिजली जैसे क्षेत्रों में अब भी बुनियादी ढांचे की कमी है, जिसके समाधान के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वे इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री और वित्त मंत्री से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विशेष सहायता के माध्यम से सहयोग दिया है और इस वर्ष जम्मू-कश्मीर को 'स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट' (एसएएससीआई ) योजना के दायरे में शामिल किया गया है।
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