नैनीताल , दिसंबर 02 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भीमताल स्थित जून (जोन्स) स्टेट के पर्यावरण संरक्षण को लेकर पीटर स्मेट चैक द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस क्षेत्र में पेड़ों के कटान और कटाई के लिए कोई भी अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी।
यह अंतरिम रोक वन विभाग, स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों पर समान रूप से लागू होगी।
मुख्य न्यायाधीश जी0 नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश गत बुधवार को जारी किया। आदेश की प्रति आज मिली। खंडपीठ ने एक पुरानी रिपोर्ट पर विशेष संज्ञान लिया है, जिसे तत्कालीन उप वन संरक्षक मनोज चंद्रन द्वारा तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट में जोन्स एस्टेट को 'वन पंचायत' और एक महत्वपूर्ण जलागम क्षेत्र' के रूप में वर्णित किया गया है।
हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि इस पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर या मुहर नहीं है।
सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि यह महत्वपूर्ण सरकारी रिपोर्ट कथित तौर पर गायब हो गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस दस्तावेज़ के गुम होने की खबर मार्च 2014 में एक समाचार पत्र में भी प्रकाशित हुई थी। अदालत ने अब राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे संबंधित अखबार के प्रकाशक से इस खबर की सत्यता की पुष्टि करें।
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