नैनीताल , अप्रैल 02 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ड्राफ्ट्समैन भर्ती को लेकर बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए एकलपीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें शहरी विकास विभाग में नियुक्ति के लिए केवल ड्राफ्ट्समैन (मानचित्रकार) ट्रेड में डिप्लोमा या आईटीआई धारकों को ही पात्र माना गया था। इस निर्णय से लंबे समय से रुकी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 01 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई करते हुए अभ्यर्थियों और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) द्वारा दायर विशेष अपीलों को स्वीकार कर लिया।
यह मामला यूकेपीएससी द्वारा 29 मई 2023 को जारी विज्ञापन से जुड़ा है, जिसके तहत वन, कृषि, संस्कृति, लोक निर्माण, लघु सिंचाई और शहरी विकास सहित विभिन्न विभागों में ड्राफ्ट्समैन/कार्टोग्राफर के 77 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।
भर्ती के दौरान एक अभ्यर्थी ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आयोग ने चयन प्रक्रिया के बीच में "संबंधित ट्रेड" की परिभाषा बदल दी। इस पर दिसंबर 2025 में सिंगल जज ने आदेश देते हुए कहा था कि शहरी विकास विभाग के लिए केवल ड्राफ्ट्समैन ट्रेड के डिप्लोमा या आईटीआई धारकों को ही चयन सूची में शामिल किया जाए।
हालांकि, खंडपीठ ने इस व्याख्या से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि सेवा नियमों में "संबंधित ट्रेड" शब्द का व्यापक अर्थ है और इसमें सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा, ड्राफ्ट्समैनशिप तथा आर्किटेक्चरल असिस्टेंटशिप जैसे कोर्स भी शामिल हो सकते हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा दी गई व्याख्या नियमों में बदलाव नहीं, बल्कि उनके दायरे को स्पष्ट करना है और तकनीकी योग्यता तय करने का अधिकार नियोक्ता विभाग के पास ही होता है।
खंडपीठ ने चार दिसंबर 2025 के एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त करते हुए भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक हटा दी है। अब यूकेपीएससी को भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने की अनुमति दे दी गई है। साथ ही अदालत ने यह भी साफ किया कि दस्तावेज सत्यापन में नाम शामिल होना नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं देता।
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