नैनीताल , मार्च 16 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चारधाम यात्रा मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों के साथ क्रूरता को रोकने के लिए गढ़वाल परिक्षेत्र के आयुक्त की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी दो सप्ताह में अस्तित्व में आयेगी और निगरानी के लिए ठोस योजना तैयार करेगी।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पशु प्रेमी गौरी मौलखी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

आज याचिकाकर्ता की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि चारधाम यात्रा पर घोड़ों के साथ क्रूरता पर रोकथाम के लिए दो साल पहले आदेश जारी किए गए हैं और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तैयार करने के निर्देश दिए थे लेकिन दो साल बाद भी अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से केदारनाथ यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की मांग की गयी। अदालत ने याचिकाकर्ता के सुझाव को स्वीकार करते हुए गढ़वाल परिक्षेत्र के आयुक्त की अगुवाई में एक कमेटी गठित करने के निर्देश दे दिए। कमेटी में संबद्ध जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी), नगर पंचायत, पशुपालन विभाग के अधिकारी और याचिकाकर्ता शामिल रहेंगे। कमेटी दो सप्ताह के अंदर बैठक कर निगरानी के लिए योजना तैयार करेगी।

याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि चारधाम यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों पर क्रूरता की घटना सामने आई हैं। उनके लिए चिकित्सा व्यवस्था का अभाव रहता है। बीमार घोड़ों के उपचार और जांच की उचित व्यवस्था नहीं होती है। यहां तक कि घोड़ों में फैलने वाली इंफुलेइंजा और ग्लैंडर्स जैसी संक्रामक बीमारियों की जांच और बचाव के लिए भी सरकार की ओर से कोई उचित उपाय नहीं की जाती हैं। इन गंभीर बीमारियों से घोड़ों की मौत हो जाती है। पिछली बार इन्फ्लुएन्जा के 680 मामले सामने आए थे।

यात्रा मार्ग पर दो घोड़ों के कंकाल बरामद हुए थे। यात्रा मार्ग पर स्वच्छता का भी विशेष ध्यान नहीं रखा जाता है। जगह जगह घोड़ों का मल बिखरा रहता है। इससे स्थानीय नदियां प्रदूषित हो रही हैं। तीर्थ यात्रा और पर्यटकों पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

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