शिमला , अक्टूबर 27 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के एक कांस्टेबल को उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच किए बिना "भगोड़ा" घोषित करने के अर्धसैनिक बल के आदेश को रद्द कर दिया है।
न्यायालय ने कहा कि आईटीबीपी ने चिकित्सा जांच के उसके बार-बार अनुरोध के बावजूद उसे बर्खास्त करके मनमाना व्यवहार किया है।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने कांस्टेबल महेंद्र सिंह द्वारा दायर एक याचिका को सोमवार को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। महेंद्र सिंह 2006 में बर्खास्त किये जाने से पहले 18 वर्षों से अधिक समय तक आईटीबीपी में कार्यरत रहे थे।
उच्च न्यायालय ने आईटीबीपी के 7 नवंबर, 2016 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके अभ्यावेदन को खारिज कर दिया गया था। न्यायालय ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को पेंशन योग्य सेवा पूरी होने की तिथि से सेवामुक्त माना जाए हालाँकि वह बकाया वेतन पाने का हकदार नहीं होगा।
याचिका के अनुसार, 1988 में आईटीबीपी में शामिल हुए महेंद्र सिंह दिसंबर 2005 में एक दुर्घटना में घायल हो गये थे और बाद में उन्हें तपेदिक का पता चला था। वह जनवरी 2006 में स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर गए और खराब स्वास्थ्य के कारण अवकाश विस्तार की मांग की, जिसे बल के प्रेषण अनुभाग ने विधिवत स्वीकार कर लिया। लेकिन उनकी चिकित्सा स्थिति की पुष्टि किए बिना आईटीबीपी ने उन्हें 15 फ़रवरी, 2006 से "भगोड़ा" घोषित कर दिया और बाद में 10 जुलाई, 2006 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।
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