नयी दिल्ली , जनवरी 19 -- उच्चतम न्यायालय ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को चंडीगढ़ की जेल में शिफ्ट करने का सुझाव दिया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ सोमवार को श्री मजीठिया की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपनी जान को खतरा होने के आधार पर अंतरिम जमानत मांगी थी। न्यायमूर्ति मेहता ने सवाल किया कि श्री मजीठिया को हिरासत में लिए जाने के बाद से उन पर कितने हमले के प्रयास हुए हैं।

न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, "हम उन्हें चंडीगढ़ जेल शिफ्ट करने के लिए कह रहे हैं, इसमें क्या समस्या है?"श्री मजीठिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने न्यायालय से अंतरिम जमानत देने का आग्रह किया और दलील दी कि उनकी जान को वास्तविक खतरा है, जैसा कि राज्य की अपनी तीन जनवरी की खुफिया रिपोर्ट में दर्शाया गया है। अधिवक्ता ने बताया कि श्री मजीठिया जून 2025 से नाभा जेल में बंद हैं।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगते हुए न्यायालय को सूचित किया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय पहले से ही इस मुद्दे पर विचार कर रहा है। राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय को आश्वासन दिया है कि श्री मजीठिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय देते हुए मामले को स्थगित करते हुए कहा कि श्री मजीठिया की अंतरिम जमानत पर अगली सुनवाई पर विचार किया जाएगा।

गौरतलब है कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने श्री मजीठिया पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी प्राथमिकी से राहत के लिए श्री मजीठिया ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। फिर श्री मजीठिया ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

यह प्राथमिकी सात जून, 2025 को मजीठिया के खिलाफ पिछले एनडीपीएस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी।

एसआईटी ने आरोप लगाया कि श्री मजीठिया और उनकी पत्नी ने घरेलू और विदेशी संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से 540 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा की थी।

ये आरोप 2007 और 2017 के बीच की अवधि से संबंधित हैं, जब श्री मजीठिया पंजाब में विधानसभा सदस्य और बाद में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यरत थे।

आरोप लगाया है कि मजीठिया दंपति ने सराया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों सहित कई कंपनियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखा। उन्होंने इन कंपनियों का उपयोग बेनामी संपत्ति हासिल करने के लिए किया। इसके साथ ही, उन्होंने साइप्रस और सिंगापुर स्थित संस्थाओं के माध्यम से विदेशी निवेश और विभिन्न कंपनियों के बीच लेनदेन का उपयोग किया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि श्री मजीठिया ने अपने परिवार के सदस्यों और नकली संस्थाओं के माध्यम से शराब, परिवहन और विमानन क्षेत्रों में व्यावसायिक फायदे के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।

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