नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तेलंगाना सरकार की संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पोलावरम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के विस्तार को चुनौती दी गयी थी।

उच्चतम न्यायालय ने हालांकि राज्य को अपनी शिकायतें उठाने के लिए उचित मंच पर जाने की स्वतंत्रता दी है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ तेलंगाना की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि गोदावरी जल विवाद अधिकरण पंचाट के तहत निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन कर गोदावरी नदी के पानी का अवैध तरीके से मार्ग परिवर्तन किया जा रहा है।

तेलंगाना की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला गंभीर संवैधानिक और कानूनी उल्लंघनों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि अधिकरण पंचाट ने गोदावरी जल का एक निश्चित आवंटन तय किया था, जबकि निर्धारित सीमाओं से परे मार्ग परिवर्तन को अवैध माना गया था। उन्होंने आगे तर्क दिया कि पोलावरम परियोजना का विस्तार संबंधित गोदावरी कानूनों के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

मुख्य न्यायाधीश ने पेश दलीलों पर टिप्पणी की कि तेलंगाना मूल रूप से वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन और अधिकरण पंचाट से परे पानी के मार्ग परिवर्तन का आरोप लगा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "आप कह रहे हैं कि पानी के वितरण का आवंटन तय है और अब उस सीमा से बाहर जाने का प्रयास किया जा रहा है।"न्यायमूर्ति बागची ने इशारा किया कि अन्य तटवर्ती राज्य यानी कर्नाटक और महाराष्ट्र भी गोदावरी पंचाट के पक्षकार थे, लेकिन उन्हें इस याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है।

"इन टिप्पणियों के बाद, श्री सिंघवी ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी कि तेलंगाना अपने कानूनी उपायों के लिए एक मुकदमा दायर करेगा। उन्होंने कहा, 'मैं इसे वापस लेता हूं और मुकदमा दायर करूंगा, जो लगभग तैयार है। मैं हर जगह समाधान के बगैर नहीं रह सकता।'इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए, पीठ ने यह कहते हुए याचिका निस्तारित कर दी कि रिट याचिका को प्रथम दृष्टया विचारणीय न मानते हुए निस्तारित किया जाता है। पीठ ने साथ ही याचिकाकर्ता को राज्य को उचित कानूनी उपाय अपनाने और इस वर्तमान रिट याचिका में उठाये गये सभी मुद्दों को उठाने की स्वतंत्रता दी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित