नयी दिल्ली , दिसंबर 09 -- उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक्स कॉर्प की भारतीय शाखा (पूर्व में ट्विटर इंडिया) की याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें 2020 में कई राज्यों में "खालिस्तान" का जिक्र करने वाले एक ट्वीट के कथित "प्रचार" को लेकर दर्ज कई प्राथमिकियों को जोड़ने या रद्द करने की मांग की गयी थी।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि वह मामले को, विशेषकर पांच वर्ष का समय बीत जाने के बाद और कई राज्यों से प्रतिनिधित्व न मिलने की वजह से और लंबित रखने के पक्ष में नहीं है।"पीठ ने कहा, "हालांकि कुछ राज्यों के वकीलों ने अपना पक्ष रखा है और वर्तमान तथ्यात्मक परिदृश्य पेश किया है, लेकिन हरियाणा, कर्नाटक और ओडिशा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। हम पांच साल बाद इस मामले को लंबित रखने के पक्ष में नहीं हैं। इतना कहना ही काफी है कि बहुत कुछ बीत चुका है। हम इस याचिका को बंद करने के पक्ष में हैं।"ट्विटर इंडिया ने गुरपतवंत सिंह पन्नू के ट्वीट के कथित प्रचार के आरोप में आठ राज्यों में एफआईआर दर्ज होने के बाद वर्ष 2020 में ऊच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। ट्विटर इंडिया का दावा है उपयोगकर्ता के ट्वीट में कही गई बातों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रहता है। उसने यह भी कहा कि इस एक मामले पर कई प्राथमिकियों का दर्ज होना कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन है, इसलिए सभी प्राथमिकियों को जोड़ दिया जाना चाहिए।
न्यायालय ने इससे पहले केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी करके प्राथमिकी और शिकायतों की स्थिति का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित