नयी दिल्ली , जनवरी 15 -- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हटाए गए मतदाताओं की सूची को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया क्योंकि इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि आपत्ति दर्ज करने का पर्याप्त अवसर दिए बिना लगभग 24 लाख नाम हटा दिये गये हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रभावित मतदाताओं को आपत्ति दर्ज करने के उनके वैधानिक अधिकार से वंचित किया गया है।

बिहार में इसी तरह की प्रक्रिया के लिए अपने पूर्व निर्देशों का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि उस मामले में भी मतदाता सूचियों के मसौदे का सार्वजनिक प्रदर्शन करने का निर्देश दिया गया था। तदनुसार, न्यायालय ने निर्देश दिया कि अगर पहले से ऐसा नहीं किया गया है ताे केरल में हटाए गए मतदाताओं की सूची को सार्वजनिक वेबसाइटों पर अपलोड किया जाए, ताकि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

नागरिकों को हो रही कठिनाइयों के मद्देनजर न्यायालय ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग मसौदा मतदाता सूची पर आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकता है। चुनाव आयोग और राज्य अधिकारियों द्वारा अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के बाद मामले की आगे सुनवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करने का विरोध किया और कहा कि 99 प्रतिशत जनगणना प्रपत्र पहले ही मतदाताओं को उपलब्ध कराए जा चुके हैं जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का संचालन केरल राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के समन्वय से किया जा रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था की गई है कि यह प्रक्रिया स्थानीय निकाय चुनावों से न टकराए।

श्री द्विवेदी ने कहा कि दोनों आयोग घनिष्ठ समन्वय से काम कर रहे हैं, जिला अधिकारियों के साथ बैठकें हो चुकी हैं और चुनाव तैयारियों के साथ-साथ एसआईआर के संचालन में कोई प्रशासनिक बाधा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के लिए सीमित संख्या में बूथ स्तरीय अधिकारियों की आवश्यकता है और राज्य चुनाव आयोग ने पुष्टि की कि उसके काम में कोई रुकावट नहीं आ रही है।

राजनीतिक दलों एवं राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल और रंजीत कुमार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के जवाबी हलफनामे पर कोई प्रतिवाद प्रस्तावित नहीं है लेकिन प्रशासनिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुनवाई सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया है।

केरल सरकार एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें आईयूएमएल के महासचिव पी.के. कुन्हालीकुट्टी, केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ और माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन मास्टर शामिल हैं।

राज्य ने एसआईआर अधिसूचना की वैधता को चुनौती नहीं दी है बल्कि इस प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की है और तर्क दिया है कि इसे स्थानीय निकाय चुनावों के साथ-साथ आयोजित करने से गंभीर प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न होंगी।

इससे पहले, 21 नवंबर को, उच्चतम न्यायालय ने केरल की उस याचिका पर नोटिस जारी किया था जिसमें एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की गई थी। राज्य ने अधिवक्ता सी.के. शशि के माध्यम से यह तर्क दिया था कि एसआईआर और स्थानीय स्वशासन चुनावों का समय आपस में टकराने से समय सीमा के भीतर चुनाव संपन्न करने के संवैधानिक दायित्व बाधित हो सकते हैं और संभावित रूप से प्रशासन लगभग ठप्प हो सकता है।

केरल में स्थानीय निकाय चुनाव नौ और 11 दिसंबर, 2026 को होने वाले हैं, जिनमें लगभग 1,200 स्थानीय स्वशासन संस्थाएं और 23,600 से अधिक वार्ड शामिल हैं और मतगणना 13 दिसंबर को होगी।

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