नयी दिल्ली , दिसंबर 09 -- उच्चतम न्यायालय ने केरल में जारी स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया के बीच मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत गणना पत्रों को जमा करने की समय सीमा को मंगलवार को बढ़ाने से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि वह 18 दिसंबर को इस मामले पर फिर से विचार करेगा जो वर्तमान में निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई अंतिम तिथि है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ केरल राज्य एवं विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी ।आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ को सूचित किया कि मूल समय सीमा 4 दिसंबर को पहले बढ़ाकर 11 दिसंबर की गयी थी जिसे बाद में अदालत के पिछले निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दिया गया था।
श्री द्विवेदी ने इस चरण में किसी भी और विस्तार का विरोध करते हुए कहा कि कल तक सभी गणना पत्रों में से 97.42 प्रतिशत का डिजिटलीकरण पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कोई भी अतिरिक्त विस्तार केवल तभी माना जाना चाहिए जब कोई ठोस आवश्यकता हो, न कि अनुमानों के आधार पर।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सचिव एम.वी. गोविंदन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. सुरेंद्रनाथ ने आग्रह किया कि समय सीमा को कम से कम दो सप्ताह और बढ़ाया जाए, क्योंकि अभी 20 लाख से अधिक व्यक्तियों का पता लगाया जाना बाकी है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य के बाहर रहने वाले कई छात्र और कर्मचारी आगामी छुट्टियों की अवधि के दौरान अपना विवरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
केरल राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता सी.के. शशि ने भी विस्तार का समर्थन करते हुए जोर दिया कि एसआईआर और स्थानीय निकाय चुनावों का एक साथ संचालन गंभीर प्रशासनिक चुनौतियां पैदा करता है।
गौरतलब है कि केरल में स्थानीय निकाय चुनाव नौ और 11 दिसंबर को दो चरणों में हो रहे हैं, जबकि मतगणना 13 दिसंबर को होनी है।
एसआईआर कार्यक्रम के अनुसार, बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की ओर से गणना 4 दिसंबर, 2025 तक पूरी होनी थी और मसौदा मतदाता सूचियों को 9 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित किया जाना था।
केरल सरकार ने कहा है कि सरकार की ओर से दायर याचिका एसआईआर अधिसूचना को चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक बोझ के बढ़ने के कारण इसको स्थगित करने की मांग को लेकर है। राज्य ने पहले केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और यह देखते हुए कि विभिन्न राज्यों से संबंधित एसआईआर मुद्दे पहले से ही उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित हैं, उसने राज्य को उच्चतम न्यायालय जाने का सुझाव दिया था।
पीठ ने केरल की याचिका के साथ भारतीय संघ मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) महासचिव पी.के. कुन्हालीकुट्टी, केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) अध्यक्ष सनी जोसेफ और माकपा सचिव एम.वी. गोविंदन मास्टर की ओर से दायर याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया।
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