नयी दिल्ली , जनवरी 16 -- उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार के उम्मीद पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों के आरोप वाली एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। एक मुतवल्ली ने याचिका दायर कर वक्फ सम्पति की जानकारी अपलोड करने के लिए इस्तेमाल होने वाले केंद्र सरकार के उम्मीद पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने शुक्रवार को याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की छूट दी।
खंडपीठ ने कहा, "हमें इस रिट याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं दिखता। याचिकाकर्ता को सलाह दी जा सकती है कि वह स्पष्टीकरण या शिकायतों के समाधान के लिए तय अधिकारियों से संपर्क करें।" "खंडपीठ ने शुरुआत में कहा कि याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय के बजाय सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा क्यों खटखटाया। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि उच्च न्यायालय ऐसे मामलों पर सुनवाई करने से हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि वक्फ कानून में 2025 के बदलावों को चुनौती देने वाले मामले पहले से ही शीर्ष न्यायालय में लंबित हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका में कानूनी नियमों को कोई बड़ी चुनौती देने के बजाय असल में "प्रशासनिक मुश्किलों" के मुद्दे उठाए गए हैं, जिन्हें उच्च न्यायालय या संबंधित अधिकारी देख सकते हैं।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मंत्रालय ने साफ किया था कि "वक्फ बाय सर्वे'' को ''वक्फ बाय यूजर" श्रेणी में समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले को सिर्फ़ एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह वर्गीकरण की कानूनी मान्यता से जुड़ा है, जिस पर न्यायालय में पहले से ही दूसरी लंबित याचिकाओं में विचार किया जा रहा था।
खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने असल में " वक्फ बाय यूजर' श्रेणी के तहत जानकारी अपलोड की थीं और एक रजिस्टर्ड वक्फ होने के नाते, इस तरह के वर्गीकरण से अधिकारों में कोई कमी नहीं आएगी।
न्यायमूर्ति बागची ने यह भी साफ़ किया कि वक्फ का रजिस्ट्रेशन पहले से मौजूद ज़रूरत थी और 2025 के संशोधन में सिर्फ़ पोर्टल पर डेटा अपलोड करना ज़रूरी किया गया था।
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