तेहरान , अप्रैल 11 -- ईरान ने 'इस्लामाबाद वार्ता' से पहले अमेरिका के साथ किसी भी समझौते तक पहुँचने के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी हैं।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार इन शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता, युद्ध से हुए नुकसान का पूरा मुआवजा, जब्त की गई संपत्ति की बिना शर्त रिहाई और एक निरंतर क्षेत्रीय संघर्ष विराम शामिल है।
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ ने स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिकी वार्ताकार "अमेरिका फर्स्ट" का रुख अपनाते हैं, तो समझौता संभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वार्ता में "इज़राइल फर्स्ट" के एजेंडे को प्राथमिकता दी गई, तो बातचीत विफल हो जाएगी।
श्री आरिफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "अमेरिका फर्स्ट" के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत से दुनिया और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद समझौता होने की संभावना है, लेकिन इज़राइल के हितों को आगे रखने पर कोई सौदा नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान अपना बचाव और भी मजबूती से जारी रखेगा, जिसकी भारी कीमत दुनिया को चुकानी पड़ेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच यह महत्वपूर्ण 'इस्लामाबाद वार्ता' शनिवार को शुरू हुई। इस वार्ता का उद्देश्य उस नाजुक दो सप्ताह के संघर्ष विराम को स्थायी बनाना है, जिसने हाल ही में ईरान और अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के बीच 40 दिनों से चल रहे विनाशकारी युद्ध को रोका है। इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया था।
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