तेहरान , नवंबर 02 -- ईरान के पूर्व वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी मोहम्मद-जवाद लारीजानी ने कहा है कि ईरान दो हफ्तों में परमाणु बम बनाने की क्षमता रखता है लेकिन फिर भी वह ऐसा नहीं करने का विकल्प चुनता है।
श्री लारीजानी ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई ने परमाणु हथियारों के विरुद्ध जारी फतवा जारी किया है जो मजबूत शिया न्यायशास्त्र पर आधारित है।
श्री खामनेई के शीर्ष सलाहकार रहे श्री लारीजानी ने कहा कि वह एक निवारक शक्ति के रूप में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विस्तार का समर्थन करते हैं लेकिन परमाणु हथियार बनाने का समर्थन नहीं करते। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते की तीखी आलोचना करते हुये कहा कि संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के तथाकथित 'कूटनीति सिद्धांत' ने ईरान को संकट की ओर धकेल दिया है।
उन्होंने कहा 'रियायतों के बदले अधिकारों' पर आधारित जेसीपीओए के सिद्धांत ऐसे हैं जैसे एक अधिकार को पाने के लिए दूसरे अधिकार को खो देना।
उल्लेखनीय है कि यह टिप्पणी ईरान के परमाणु कार्यक्रम की अंतर्राष्ट्रीय जाँच के बीच आयी है, जहाँ परमाणु संवर्धन के स्तर और उसके भंडार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विश्लेषकों ने श्री खामेनेई के तथाकथित फतवे की प्रामाणिकता और कानूनी मान्यता पर भी सवाल उठाये हैं।
अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि ईरानी रुख़ कूटनीतिक प्रयासों को जटिल बनाता है क्योंकि ईरान परमाणु हथियारों को विकसित कर लेने की क्षमता के होने का दावा भी करता है और इस पर भी जोर देता है कि वह स्वेच्छा से ऐसा नहीं करता है।
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